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पंजाब में पराली जलाने के मामले 45 फीसदी बढ़े: रिमोट सेंटर के आंकड़े

पंजाब में धान की कटाई का मौसम शुरू हो गया है. राज्य में पहले ही 11 अक्टूबर तक पराली जलाने में 45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, हालांकि प्रशासन को उम्मीद है कि इस साल सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद इसमें कमी आएगी.

पंजाब में पराली जलाने के मामले 45 फीसदी बढ़े: रिमोट सेंटर के आंकड़े
पंजाब रिमोट सेसिंग सेंटर के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में पिछले साल 11 अक्टूबर तक पराली जलाने की 435 घटनाएं दर्ज की गई थीं.

चंडीगढ़: पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 45% की वृद्धि दर्ज की गई है. पंजाब एग्रीकल्चर सेक्रटरी ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए सामने आए आंकड़ों को नकारा है. ZEE मीडिया से बातचीत के दौरान पंजाब एग्रीकल्चर सेक्रटरी के एस पन्नू ने कहा कि पंजाब में पराली जलाने के मामलों में इस साल कमी दर्ज की गई है. पंजाब में धान की कटाई का मौसम शुरू हो गया है. राज्य में पहले ही 11 अक्टूबर तक पराली जलाने में 45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, हालांकि प्रशासन को उम्मीद है कि इस साल सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद इसमें कमी आएगी. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) यानि कि पंजाब रिमोट सेसिंग सेंटर के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में पिछले साल 11 अक्टूबर तक पराली जलाने की 435 घटनाएं दर्ज की गई थीं जबकि इस साल इसी अवधि में यह आंकड़ा बढ़कर 630 तक पहुंच गया और 12 अक्टूबर तक यह आकंडा 706 तक पहुंच गया है. अकेले अमृतसर में इस अवधि के दौरान खेत में पराली जलाने की 295 घटनाएं हुई हैं. तरनतारन में 126 और पटियाला में 57 मामले सामने आएं हैं. 

11 अक्टूबर को कहां कहां पराली जलाने के कितने मामले सामने आए-:
अमृतसर: 25
पटियाला: 16
तरनतारन: 10
जालंधर: 7
गुरदासपुर: 4
कपूरथला: 3
फतेहगढ़ साहिब: 2
फाज़िल्का: 2
फिरोज़पुर: 2
मानसा: 2
मोगा: 1
एस बी एस नगर: 1
एसएएस नगर: 1
संगरूर: 1

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मगर, वहीं पंजाब के कृषि सचिव के. एस. पन्नू का कहना है कि सेटेलाईट दृारा ली तस्वीरों से पराली जलाने की स्पष्ट तस्वीर नहीं मिल पाती है. उन्होंने कहा, 'सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में डंप यार्ड और श्मशान घाट की तस्वीरें भी शामिल हैं. अभी पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं. पिछले साल की तुलना इस साल ऐसे मामलों में कमी आई है. 

'पन्नू ने कहा कि केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में 2016 में 1 से 10 अक्टूबर तक पराली जलाने की घटनाएं 1,714 दर्ज की गई थीं लेकिन 2019 में इस अवधि में ये घटनाएं घटकर 430 हो गई हैं. के एस पन्नू ने कहा कि पंजाब सरकार पराली जलाने को लेकर किसानों को पहले ही चेता चुकी है. कृषि विभाग ने ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग से आग्रह किया है कि वे पराली जलाने पर रोक लगाकर स्वच्छ, हरित और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण सुनिश्चित करें. के एस पन्नू ने कहा कि किसानों के पिछले साल 28000 मशीनें मुहैया करवाई थी और इस बार अब तक 14000 मशीनें किसानों को भेजा जा चुकी हैं. 

किसानों की तरफ से पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में पेश हो रहे वकील चरणपाल सिंह बागड़ी ने कहा कि किसान भी पराली नहीं जलाना चाहते लेकिन उनके पास पराली को खत्म करने का और कोई ज़रिया नहीं है इसलिए वो ट्रेडिशनल तरीके से ही पराली जला रहें है. उन्होनें कहा सरकारें बड़े बड़े दावे कर रहीं है लेकिन ग्राऊंड रियेलटी इससे बिल्कुल अल्ग है. वकील चरणपाल ने कहा कि हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को किसानों दृारा पराली जलाने पर एनवायरमेंट कम्पनसेंशन के तौर पर ज़ुर्माना लगाने के लिए मना किया है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि किसान अपनी मर्ज़ी से पराली जला रहें है उन्होने कहा किसान मजबूर हैं.

बता दें हरियाणा और यू पी के मुकाबले पंजाब में पराली जलाने के मामले ज्यादा सामने आए हैं. यहां 1 से 10 अक्टूबर तक पंजाब में 430 मामले दर्ज किए गए है वहीं हरियाणा से 420 और यू पी से 119 मामले सामने आएं हैं. गौरतलब है 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच की अवधि को महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि अधिकांश किसान इस दौरान अपनी धान की फसल काटते हैं. और जैसे जैसे तापमान में गिरावट दर्ज होती है वैसे वैसे प्रदूषण का असर वातावरण पर ज्यादा पड़ता है.