पंजाब में पराली जलाने पर काफी हद तक नियंत्रण किया जाएगा : PPCB

पीपीसीबी चेयरमैन के एस पन्नू ने बताया कि हम पंजाब में धान की पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए सभी कदम उठा रहे हैं. 

पंजाब में पराली जलाने पर काफी हद तक नियंत्रण किया जाएगा : PPCB
पंजाब सरकार ने उन भूमियों का लाल स्याही से रिकॉर्ड रखना शुरू कर दिया है जहां धान की पराली जलाई गई है. (FILE-फोटो साभार - डीएनए)

चंडीगढ़: पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने शनिवार को कहा कि राज्य में धान की ठूंठ जलाने की समस्या को जागरूक किसानों के सहयोग से और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कदम उठाकर इस साल ‘‘काफी हद’’ तक नियंत्रित किया जाएगा. पीपीसीबी चेयरमैन के एस पन्नू ने बताया कि हम राज्य में धान की पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए सभी कदम उठा रहे हैं. 

'इस साल पराली जलाने के कम मामले दर्ज किए गए हैं'
उन्होंने कहा,‘‘इस साल पराली जलाने के कम मामले दर्ज किए गए हैं. हम किसानों के सहयोग से फसल के अवशेषों को जलाने पर नियंत्रण पाने में सक्षम होंगे और पराली जलाने से रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.’’ इस पर नियंत्रण पाने के कदमों के तहत राज्य सरकार राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों पर जुर्माना लगा रही है.

पन्नू ने कहा, ‘‘100 से ज्यादा मामलों में जुर्माना लगाया गया है.’’ उन्होंने बताया कि अभी तक पराली जलाने के करीब 300 मामले दर्ज किए गए हैं. राज्य सरकार ने उन भूमियों का लाल स्याही से रिकॉर्ड रखना शुरू कर दिया है जहां धान की पराली जलाई गई है.

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘भूमि के लाल स्याही वाले रिकॉर्ड से किसान की पहचान सरकार के दिशा निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन करने वाले के रूप में होगी और इससे यह जानकारी भी मिलेगी कि कितने किसानों ने धान की पराली जलाई.’उन्होंने बताया कि अगर कृषि भूमि का मालिकाना हक रखने वाला कोई सरकारी कर्मचारी पराली जलाता है तो उसे कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

अधिकारी ने बताया कि पराली जलाने की जांच करने और किसानों को शिक्षित करने के लिए गांवों में ब्लॉक स्तर पर विशेष टीमें गठित की गई है. पीपीसीबी चेयरमैन ने कहा कि राज्य में कुछ ‘पंचायतों’ ने पराली ना जलाने का संकल्प लिया है.

बहरहाल, किसान संगठन ‘‘भारतीय किसान संघ’’ उग्रहण) ने कहा कि जब तक सरकार वित्तीय सहायता मुहैया नहीं कराती तब तक उनके पास पराली जलाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. बीकेयू के महासचिव सुखदेव सिंह ने कहा, ‘‘हम पर्यावरण के अनुकूल उपायों के जरिये अवशेषों के निस्तारण के लिए प्रति एकड़ भूमि पर 5,000 से 6,000 रुपये का खर्च कैसे वहन कर सकते हैं.’’