Rahul Gandhi on G RAM G Video: राहुल गांधी ने एक आयोजन में 'वीबी जी राम जी' योजना का सही नाम लेना तो दूर कुछ ऐसे अंदाज में 'जी ग्राम जी...क्या?' बोला. इसके बाद बीजेपी के तमाम नेताओं ने उन्हें घेर लिया. बीजेपी नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी को भगवान राम का नाम लेने से ही दिक्कत है.
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Tamil Nadu Assembly resolution against VB-G RAM G Act: तमिलनाडु विधानसभा ने केंद्र सरकार द्वारा एमजीएनआरईजीए का नाम बदलकर 'जी राम जी' करने के प्रस्तावित फैसले का विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया. यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पेश किया था. इसके बाद बीजेपी सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने डीएमके की स्टालिन सरकार के साथ राहुल गांधी को भी लपेटे में लिया. राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने दावा किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता ने एक कार्यक्रम में इसी योजना का जिक्र करते हुए भगवान 'राम' का नाम न लेने से परहेज किया.
तमिलनाडु-केरल सरकार से पूछा सवाल
अपनी बात बढ़ाते हुए बीजेपी नेता ने कहा, 'मैं पूछना चाहता हूं कि अगर कोई बिल भारत की संसद ने सही तरीके से पास किया है और सुप्रीम कोर्ट ने भी उस पर कोई आपत्ति नहीं जताई और ना ही उस पर रोक लगाई है, तो क्या किसी राज्य की विधानसभा के पास उसके खिलाफ बिल पास करने का संवैधानिक अधिकार है? मैं तमिलनाडु और केरल की सरकारों से पूछना चाहता हूं कि अगर आपकी विधानसभा से कोई प्रस्ताव पास होता है, तो क्या किसी जिला पंचायत या म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पास ये कानून पास करने का अधिकार है कि वो केरल या तमिलनाडु के कानून को नहीं माने'.
'अब संविधान खतरे में नहीं'
बीजेपी नेता ने ये भी कहा, 'मैं राहुल गांधी से आगे पूछना चाहूंगा कि क्या अब संविधान खतरे में नहीं है, जब पार्लियामेंट के एक एक्ट को उनके इंडिया गठबंधन की पार्टी डीएमके तमिलनाडु विधानसभा से खुलेआम चुनौती दे रही है. जबकि उनका यह कृत्य संविधान और उसकी भावना के खिलाफ है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर तक सबने कहा है कि संसद से पास हुआ कानून पूरे देश पर लागू होता है. क्योंकि वो देश के सभी नागरिकों के लिए जरूरी होता है. क्या अब संविधान खतरे में नहीं है? उनके दोमुहे रवैये से ऐसा लगता है कि उनके लिए संविधान एक ऐसी चीज है जिसे वो महज जेब में रखते हैं और सुविधा के हिसाब से इस्तेमाल करते हैं.
निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण!
राहुल गांधी जी का ‘राम’ नाम से परहेज किसी से छिपा नहीं है, लेकिन RAM G को जानबूझकर “ग्राम जी” कहना सनातन संस्कृति के प्रति उनकी कुंठित और अपमानजनक सोच को एक बार फिर उजागर करता है।
यह न केवल Non - serious Politician की निशानी है, बल्कि भारत की आस्था,… pic.twitter.com/btp5SOQLQ3
— BJP Madhya Pradesh (@BJP4MP) January 22, 2026
बगुला भगत और रंगा सियार की कहानी
राहुल गांधी पर बरसते हुए उन्होंने ये भी कहा, 'राहुल गांधी के ज्ञान पर कौन टिप्पणी कर सकता है. राहुल गांधी केवल 'जी राम जी' का नाम लेने में अटक गए, ऐसा नहीं है. याद करिए वो विश्वेश्वरैया भी नहीं बोल पाए थे जो भारत के फर्स्ट इंजीनियर थे और अगर पूरा नाम लेना पड़ जाता तो पता नहीं क्या हो जाता'.
क्या आपने पढ़ी है बगुला भगत और रंगा सियार की कहानी? बीजेपी नेता ने सुनाया ऐसा किस्सा... pic.twitter.com/d9zzqUSZtt
— Shwetank Ratnamber (@swwetanksr) January 23, 2026
उन्होंने आगे कहा, 'कहावत है- 'मुंह में राम, बगल में छुरी' पर यहां तो मुंह में भी 'राम' नहीं आ पा रहा, जो खुद को शिव भक्त और कुर्ते के ऊपर जनेऊ दिखाता है, गोत्र समेत खुद को ब्राह्मण बताने वाला राम का नाम न ले पाया. देश की जनता ने बगुला भगत और रंगा सियार की कहानी जो पढ़ी होगी उसे वो समझ गई होगी'.
आइए आपमें से जिसने रंगा सियार और बगुला भगत की कहानी बचपन में नहीं सुनीं उसे इनके बारे में बताते हैं. दोनो कहानियां दुनियाभर में पॉपुलर किताब पंचतंत्र (Panchtantra Moral stories) से ली गई हैं.
रंगा सियार की कहानी
यह कहानी एक धूर्त सियार की है जो अपनी चतुराई से जंगल का राजा बन बैठा और अन्य जानवरों को डरा-धमकाकर सेवा करवाता था. जंगल में एक सियार था. वो कई दिन से भूखा था. एक बार वो जंगल से शहर गया. जैसे ही सियार शहर में घुसा, कुत्ते उसे देखकर भौकने और दौड़ाने लगे. सियार जब भाग रहा था, तब रास्ते में उसे एक घर की खिड़की दिखी तब वो कूदकर अंदर आ गया. जहां नीले रंग के पानी से भरा ड्रम रखा था. सियार उसमें गिरा और नीले रंग में रंग गया. वो घबराकर बाहर निकला तो नीले रंग का प्राणी देख कुत्ते भाग गए. जब वो नदी पर पानी पीने गया तो पानी में अपनी परछाई देखकर चौंका और समझ गया कि कुत्ते उसे देख क्यों डर रहे थे.
तभी उसके दिमाग में प्लान आया. वो वापस लौटा और सारे जानवरों को बुलाकर बोला, आज से मैं जंगल का राजा हूं, मेरी आज्ञा सबको माननी होगी. मेरे लिए रोज दिन सबको भोजन लाना होगा. सब जानवर उसकी आज्ञा मानकर उसकी सेवा करने लगें. इस तरह कुछ समय तक सियार जंगल पर राज करता रहा. एक दिन अचानक जंगल में सियारों का एक झुंड ऊंचे स्वर में हुआं-हुआं करने लगा.
अपने लोगों की आवाज सुनकर सियार भी उन लोगों के साथ हुआं- हुआं करने लगा. आवाज सुनकर सभी जानवर बोले ये कोई राजा नहीं, अपना सियार है. उसकी पोल खुल गई तो उसे बहुत मार पड़ी. सियार खुद को बचाने के तमाम बहाने मारता रहा लेकिन जंगल के जानवरों ने पीट-पीटकर बदला लिया. इस कहानी से सीख मिलती है कि हमें किसी को बेवकूफ नहीं समझना चाहिए.
बगुला भगत की कहानी
एक तालाब में एक आलसी बगुला था वो बिना कुछ किए खाने-पीने का इंतजाम करना चाहता था. एक दिन उसे आइडिया आया तो उसे वो आजमाने बैठ गया. उसने तालाब किनारे बाकी जीवों को बुलाया और रोते हुए बोला आज से वो शिकार नहीं करेगा. क्योंकि अकाल पड़ने वाला है. 12 साल तक पानी की एक बूंद न गिरेगी, तालाब सूख जाएगा और सब मर जाएंगे. भगवान ने ये बात उसे बताई है इसलिए वो किसी का शिकार यानी हिंसा करके और पाप नहीं करेगा. भगत बनकर भगवान का भजन करेगा. जानवरों ने पूछा कोई उपाय तो होगा जहां का पानी खत्म न हो, तो उसने कहा कि थोड़ी दूर एक जलाशय है उसका पानी कभी नहीं सूखेगा, लेकिन वहां वही जा सकता है जो आंखें बंदकर चुपचाप बगुले के साथ वहां जाए. सब जानवर उसकी बातों में आ गए. सब बगुला भगत की जय जयकार करने लगे.
अब बगुला भगत की पौ-बारह हो गई. वो रोज एक जीव को अपनी पीठ पर बिठाकर ले जाता और कुछ दूर ले जाकर एक चट्टान के पास जाकर उसे उस पर पटककर मार देता और खा जाता. कभी मन करता तो बगुला भगतजी तालाब के दो चक्कर लगा लेते यानी दो-दो जीवों को चट कर जाते थे. धीरे-धीरे तालाब में जानवरों की संख्या घटने लगी. चट्टान के पास मरे जीवों की हड्डियों का ढेर बढ़ने लगा और भगतजी की सेहत बनने लगी वो खा-खाकर मोटा गए. मुह पर लाली आ गई और उसके पंख चर्बी के तेज से चमकने लगे. उन्हें देखकर दूसरे जीव कहते देखो, दूसरों की सेवा का फल और पुण्य भगतजी के शरीर को लग रहा है. बगुला भगत मन ही मन खूब हंसता, वो सोचता कि देखो दुनिया में कैसे-कैसे मूर्ख भरे पड़े हैं, जो आसानी से सबका भरोसा कर लेते हैं. ऐसे मूर्खों की दुनिया में थोड़ी चालाकी से काम लिया जाए तो मजे ही मजे हैं. बिना हाथ-पैर मारे दावत उड़ाई जा सकती है. एक केकड़ा जब उससे सवाल पूछता है तो वो उसे बीच रास्ते में सच्चाई बता देता है. केकड़ा सारी बात जानकर डर से सिहर उठा लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी. उसने तुरंत अपने पंजों को आगे बढ़ाकर दुष्ट बगुले की गर्दन दबोच ली और तब तक दबाए रखी, जब तक बगुला भगत के प्राण पखेरु नहीं हो गए. इसके बाद केकड़ा बगुले भगत का कटा सिर लेकर तालाब पर लौटा और सारे जीवों को सच्चाई बता दी कि कैसे दुष्ट बगुला भगत उन्हें धोखा देता रहा था.