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नक्सलियों के इस गढ़ में गर्मियों में ही क्यों होते हैं जवानों पर हमले?

सुकमा जिला देश के राज्यो में दक्षिण पूर्व की तरफ की अंदर की तरफ स्थित छत्तीसगढ़ राज्य में है. सुकमा जिला छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भाग का जिला है और इसका पूर्वी भाग उड़ीसा से मिलता है दक्षिण पश्चिमी और दक्षिणी भाग क्रमश तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से मिलते है. सुकमा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 392 किलोमीटर दक्षिण पूर्व की तरफ है और देश की राजधानी दिल्ली से 1560 किलोमीटर दक्षिण पूर्व की तरफ ही है. सुकमा छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा के बॉर्डर पर है. 

नक्सलियों के इस गढ़ में गर्मियों में ही क्यों होते हैं जवानों पर हमले?
माओवादी जंगलों का फायदा उठाकर बड़ी घटनाओं को अंजाम दे जाते हैं. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: सुकमा जिला देश के राज्यो में दक्षिण पूर्व की तरफ की अंदर की तरफ स्थित छत्तीसगढ़ राज्य में है. सुकमा जिला छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भाग का जिला है और इसका पूर्वी भाग उड़ीसा से मिलता है दक्षिण पश्चिमी और दक्षिणी भाग क्रमश तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से मिलते है. सुकमा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 392 किलोमीटर दक्षिण पूर्व की तरफ है और देश की राजधानी दिल्ली से 1560 किलोमीटर दक्षिण पूर्व की तरफ ही है. सुकमा छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा के बॉर्डर पर है. 

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नक्सलियों का गढ़ है सुकमा

आदिवासी बहुल जिला सुकमा राष्ट्रीय राजमार्ग 30 के जरिए जगदलपुर से जुड़ा हुआ है. छत्तीसगढ़ के दक्षिण में ओडिशा के मलकानगिरी जिले और आंध्र प्रदेश के साथ जिला सीमाओं से लगा हुआ है. 1 जनवरी 2012 को दंतेवाड़ा जिला से काटकर सुकमा जिले का गठन किया गया था. सुकमा अति नक्सल प्रभावित जिलों में से एक है. नक्सली अबतक यहां कई बार हमले को अंजाम दे चुके है.

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नक्सली उठाते हैं घने जंगल का फायदा

यहां जंगल अधिक हैं और माओवादी जंगलों का फायदा उठाकर बड़ी घटनाओं को अंजाम दे जाते हैं. सुकमा जिला दंतेवाड़ा, बस्तर, और बीजापुर से घिरा है. ये जिले भी अति नक्सल प्रभावित में से हैं. दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश और ओडिशा से भी माओवादी सुकमा के जंगलों में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं. क्योंकि यह तीन राज्यों की सीमाओं से मिलता है इसलिए नक्सलियों को वारदात को अंजाम देने के बाद भागने में आसानी होती है और वह फिर इन्हीं घने जंगलों में कहीं छुप जाते है.

घने जंगलों और पहाड़ों से घिरा हुआ है सुकमा

सुकमा घने जंगलों से भरा हुआ है. यहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ भी है. बरसात के दिनों में यह जगह हरियाली से पूरी तरह भर जाता है. नक्सली इसी घने जंगल का फायदा उठाते है. नक्सली जवानों पर हमले को अंजाम देने के बाद इन्हीं घने जंगलों या पहाड़ों में छुप जाते है. गर्मी के दिनों में नक्सली ज्यादातर हमले इसलिए कर पाते हैं क्योंकि इस दौरान पेड़ों के पत्ते सूखकर नीचे गिरते है और कम होते जाते है. लिहाजा नक्सलियों को हमला करने में आसानी होती है क्योंकि वह दूर तक देख पाते है.

गर्मियों में होते हैं ज्यादा हमले

चूंकि जंगल इस दौरान उतना घना नहीं होता लिहाजा वह जवानों के मूवमेंट का जायजा लेते रहते हैं और मौका मिलते ही घात लगाकर हमला कर देते है. नक्सली हमले को अंजाम देने के बाद घने जंगलों में छिप जाते है जिसके बाद उन्हें ढूंढना बेहद मुश्किल होता है. गर्मियों में जवानों लिए भी पेट्रोलिंग करने में आसानी होती है क्योंकि इस दौरान वह नक्सलियों की गतिविधि पर आसानी से नजर रख पाते है. बरसात में बारिश के बाद जंगल और घना हो जाता है लिहाजा इस दौरान नक्सली हमले बेहद कम या ना के बराबर हो जाते है.

कल 25 जवान हुए शहीद

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में नक्सलियों ने पुलिस दल पर कल घात लगाकर हमला किया था जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 25 जवानों की मौत हो गयी तथा छह जवान घायल हो गए. राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुकमा जिले के चिंतागुफा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बुरकापाल गांव के करीब नक्सलियों ने पुलिस दल पर घात लगाकर हमला किया. इस हमले में सीआरपीएफ के 25 जवानों की मौत हो गयी तथा छह जवान घायल हो गए.