सुप्रीम कोर्ट ने किया योगी सरकार से सवाल- कैसे बने शहरी बेघरों के आधार कार्ड

उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से जानना चाहा कि शहरी बेघरों के आधार कार्ड कैसे बन रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने किया योगी सरकार से सवाल- कैसे बने शहरी बेघरों के आधार कार्ड
सुप्रीम कोर्ट ने किया सरकार से सवाल (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से जानना चाहा कि शहरी बेघरों के आधार कार्ड कैसे बन रहे हैं. न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने देश भर में शहरी बेघरों को बसेरे उपलब्ध कराने के लिये दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से यह जानकारी मांगी. राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से पीठ ने सवाल किया, ‘‘यदि कोई व्यक्ति बेघर है तो आधार कार्ड में उसे कैसे वर्णित किया जाता है.’’ मेहता ने इस सवाल के जवाब में शुरू में कहा, ‘‘यही संभावना है कि उनके पास आधार नहीं होगा.’’ इस पर पीठ ने जानना चाहा कि क्या आधार कार्ड नहीं रखने वाले ऐसे बेघर लोग ‘‘भारत सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार के लिये अस्तित्व में ही नहीं है’’ और उन्हें इन बसेरों में जगह नहीं मिलेगी.

मेहता ने स्पष्टीकरण दिया कि यह कहना सही नहीं है कि जिनके पास आधारकार्ड नहीं है उनका अस्तित्व ही नहीं है क्योंकि उनके पास मतदाता पहचान पत्र जैसे दूसरे पहचान संबंधी कार्ड हैं जिनमें उनका पता होता है.

मेहता ने कहा, ‘‘हम एक मानवीय समस्या से निबट रहे हैं. आधार के लिये स्थाई पता दिया जा सकता है. वे (शहरी बेघर) आने जाने वाली आबादी में आते हैं.’’ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस स्थित के प्रति सजग है और वह ऐसे सभी व्यक्तियों के लिये बसेरों में जगह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है. हालांकि न्यायालय ने कहा कि सरकार के मुताबिक देश की 90 प्रतिशत आबादी को आधार कार्ड दिया जा चुका है.

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आधार डाटा लीक होने की खबरों के बीच भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने इसमें कुछ और बदलाव करने का निर्णय लिया है. यूआईडीएआई ने वर्चुअल आईडी की शुरुआत करने का फैसला किया है. अब कई सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए आधार नंबर नहीं देना होगा. यानी आपको 12 अंकों के आधार नंबर की बजाय 16 नंबर की वर्चुअल आईडी देनी होगी. यूआईडीएआई के मुताबिक वर्चुअल आईडी जनरेट करने की यह सुविधा 1 जून से अनिवार्य हो जाएगी. यूआईडीएआई ने सभी एजेंसियों को प्रमाणीकरण और ईकेवायसी जैसी सेवाओं के लिए वर्चुअल आईडी का उपयोग करने का निर्देश दिया है.

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यूआईडीएआई का कहना है कि एक मार्च से यह सुविधा शुरू हो जाएगी लेकिन 1 जून से यह अनिवार्य हो जाएगी. 1 जून से सभी एजेंसियों इस व्यवस्था को अनिवार्य रूप से शुरू करना होगा. गौरतलब है कि आरबीआई ने भी अपनी रिपोर्ट में पाया था कि बायोमेट्रिक आधार पर दी जाने वाले लाभ की प्रणाली अस्पष्ट है. इसके अलावा, पिछले हफ्ते 10 मिनट में लाखों लोगों का आधार डेटा महज 500 रुपये में हासिल करने की भी खबर आई थी. हालांकि यूआईडीएआई ने इसका पुरजोर खंडन किया था. 

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(इनपुट एजेंसी से भी)