Supreme Court on Reservation: आरक्षण का मुद्दा अपने देश में सुर्खियों में रहता है. राजनीतिक मामला हो, शैक्षणिक या कोर्ट में केस, आरक्षण शब्द आते ही लोगों के कान खड़े हो जाते हैं. अब सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र से जुड़े एक मामले में गंभीर सवाल किया है. बात 50 प्रतिशत से ऊपर आरक्षण की सीमा जाने की हो रही थी. पढ़िए आगे क्या हुआ.
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महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आज (17 नवंबर) एक महत्वपूर्ण सवाल कर दिया. जस्टिस सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछ लिया कि मु्द्दा यह है कि आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा कैसे हो सकता है? इससे पहले, कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनाव कराने की समयसीमा बढ़ा दी थी और निर्देश दिया था कि ये इलेक्शन 31 जनवरी 2026 तक करा लिए जाएं. आगे SC ने आदेश दिया कि परिसीमन की प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाए और यह चुनाव स्थगित करने का आधार नहीं बनना चाहिए. पढ़िए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे. बागची की पीठ ने समक्ष सुनवाई में आज किसने क्या कहा.
एसजी तुषार मेहता से जस्टिस कांत- मामला यह है कि आरक्षण 50% से अधिक कैसे हो सकता है?
एसजी- चुनाव प्रक्रिया चल रही है. नामांकन कल (18 नवंबर) से दाखिल किए जाएंगे.
जस्टिस कांत- मुद्दा ये है कि बंठिया आयोग की रिपोर्ट स्वीकार की जा सकती है या नहीं, इस पर यह कोर्ट अंतिम सुनवाई के समय विचार करेगा. स्टेट का एक पुराना कानून कहता है कि 50% आरक्षण...
जस्टिस बागची- हम पूरी तरह जागरूक हैं. हमने संकेत दिया था कि बंठिया से पहले की स्थिति बनी रह सकती है लेकिन क्या इसका मतलब सभी के लिए 27 प्रतिशत है? अगर ऐसा है, तो हमारा निर्देश इस कोर्ट के पहले के आदेश के उलट है. ऐसे में होगा यह कि यह आदेश दूसरे आदेश के उलट होगा.
(2022 में महाविकास अघाड़ी सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण को लेकर पूर्व मुख्य सचिव जयंत कुमार बांथिया (बांठिया) की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया था.)
एसजी- मुझे जवाब दाखिल करने दीजिए.
जस्टिस कांत- इस दौरान आप 50% आरक्षण की सीमा पार मत कीजिएगा अन्यथा, मामला निरर्थक हो जाएगा.
जस्टिस बागची- कितनी नगरपालिकाओं में 50% की सीमा क्रॉस हो गई है?
सीनियर एडवोकेट विकास सिंह- 40 प्रतिशत.
आदेश (आईए पर): नोटिस जारी
(जब किसी पहले से लंबित मामले में दखल के लिए नई अर्जी दाखिल होती है, उसे IA यानी Intervention Application कहा जाता है)
जस्टिस कांत- वे सही कह रहे हैं कि हमारे आदेश का गलत अर्थ निकाला जा रहा है. हमने कभी 50% नहीं कहा. हमें सीबी ऑर्डर के विपरीत आदेश पारित करने के लिए मजबूर न करें.
सीनियर एडवोकेट नरेंद्र हुड्डा- कुछ मामलों में आरक्षण 70% तक चला जाता है.
जस्टिस कांत- इसकी परमिशन नहीं दी जा सकती है.
जस्टिस बागची- सीबी ने साफ कहा था कि ओबीसी के लिए आरक्षण 50% से ज्यादा नहीं हो सकता.
(यहां सीबी का मतलब संवैधानिक पीठ से है)
जस्टिस कांत (एसजी के अगले दिन सुनवाई की मांग पर): अगले दिन तक नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया स्थगित रखें. हमारे साधारण आदेश को अधिकारियों ने उलझा दिया है.
एसजी- हर चीज कल के आदेश के अधीन हो सकती है.
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