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बेजुबानों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुन फफक-फफक कर रोने वाली कौन हैं याचिकाकर्ता, कहा- अब ईश्वर न्याय करेगा...

Supreme Court Order On Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों और मवेशियों को हटाने का आदेश दिया है, जिससे देशभर में बहस छिड़ गई है. इस फैसले का समर्थन करते हुए याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट की वकील नमिता शर्मा ने कहा कि यह आदेश नागरिक सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन यह जानवरों के लिए भी एक कठिन स्थिति है.

 

बेजुबानों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुन फफक-फफक कर रोने वाली कौन हैं याचिकाकर्ता, कहा- अब ईश्वर न्याय करेगा...

Supreme Court Order On Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट द्वारा सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों और मवेशियों को हटाने के आदेश के बाद देशभर में बहस छिड़ गई है. कोर्ट के इस फैसले ने जहां आम लोगों को राहत की उम्मीद दी है, वहीं पशु अधिकार कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा देखी जा रही है. इसी बीच, इस मामले की प्रमुख याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट की वकील नमिता शर्मा कोर्ट के आदेश सुनने के बाद भावुक हो उठीं।

नमिता शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का 11 अगस्त का आदेश फिर से लागू कर दिया गया है, हालांकि इसमें कुछ बदलाव किए गए हैं. उन्होंने कहा कि अब आवारा कुत्तों को सभी संस्थानों, स्कूलों, अस्पतालों और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थलों से हटाकर अन्य स्थानों पर ले जाया जाएगा. इसके लिए अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे ताकि वे वापस न लौटें. यह आदेश बहुत कठोर है, लेकिन मैं अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी हूं. उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके लिए बहुत दर्दनाक है, क्योंकि यह उन बेजुबान जानवरों के अधिकारों को प्रभावित करता है जो सड़क पर रहने को मजबूर हैं. अदालत से बाहर निकलते हुए वे भावुक होकर रो पड़ीं और कहा कि अब ईश्वर ही न्याय करेगा.

वकील विवेक शर्मा ने कहा कि आखिरकार, सभी बेजुबान हटा दिए जाएंगे. गोवा कोर्ट ने हाल ही स्पष्ट किया कि सरकारी रिकॉर्ड में पिछले तीन सालों में सिर्फ 372 कुत्ते काटने के मामले हैं, लेकिन असल आंकड़ा 37387 है. आज का आदेश पुराने आदेश की समीक्षा है, बिना याचिकाकर्ताओं को सुने. सरकार के लिए आश्रय घर बनाना संभव नहीं. सुप्रीम कोर्ट के वकील सुनील लांबा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि नेशनल हाईवे से सभी आवारा कुत्तों और मवेशियों को तुरंत हटाया जाना चाहिए. यह जिम्मेदारी पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट और नगर निगमों को दी गई है ताकि वे आठ हफ्तों के अंदर उन्हें हटा दें. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि नोडल अधिकारी इस आदेश को लागू करने के लिए जवाबदेह होंगे.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है. कोर्ट ने प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे से बचाने और राजमार्गों से आवारा मवेशियों व अन्य जानवरों को हटाने के लिए कई निर्देश जारी किए. देश भर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन मामले पर स्वतः संज्ञान मामले न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई की. इस दौरान उन्होंने आदेश दिया कि आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, सार्वजनिक खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर उचित बाड़ लगाई जाए. न्यायमूर्ति नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्थानीय नगर निकायों को ऐसे परिसरों की नियमित तौर पर निगरानी करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही उन्होंने पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 के तहत अनिवार्य टीकाकरण और नसबंदी के बाद जानवरों को निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया.

कोर्ट ने दिया 8 हफ्ते का अल्टीमेटम

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इन सार्वजनिक स्थानों से हटाए गए कुत्तों को उसी स्थान पर वापस नहीं लाया जाना चाहिए. साथ ही, कोर्ट ने समय-समय पर निरीक्षण करने का निर्देश दिया. पीठ ने राजमार्गों से आवारा पशुओं और अन्य जानवरों को तुरंत हटाने का भी आदेश दिया. पीठ ने कहा कि ऐसे जानवरों को बिना किसी देरी के निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में पहुंचाया जाए. शीर्ष अदालत ने आदेश दिया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें. अन्यथा, अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा. साथ ही, निर्देशों को लागू करने के लिए अपनाई गई व्यवस्थाओं के लिए आठ हफ्तों के अंदर अनुपालन स्थिति रिपोर्ट (कंप्लायंस स्टेटस रिपोर्ट) मांगी.

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Shashank Shekhar Mishra

ज़ी न्यूज में बतौर सब एडिटर कार्यरत. देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करते हैं. पत्रकारिता में 5 वर्षों का अनुभव है. इससे पहले टाइम्स नाउ नवभारत, जागरण...और पढ़ें

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