जज vs सीजेआई: बार काउंसिल के डेलीगेशन ने जस्टिस चेमलेश्वर से की मुलाकात, शाम को CJI से मिलेंगे

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के इस 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बीसीआई के चेयरमैन मनन मिश्रा ने किया. 

जज vs सीजेआई: बार काउंसिल के डेलीगेशन ने जस्टिस चेमलेश्वर से की मुलाकात, शाम को CJI से मिलेंगे
बारा काउंसिल के सात सदस्यों का डेलीगेशन जस्टिस चेमलेश्वर के निवास पर पहुंचा (फोटो- एएनआई)

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उपजे विवाद को कम करने की कवायद में रविवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के प्रतिनिधिमंडल ने पहल करते हुए जस्टिस चेमलेश्वर से मुलाकात की. 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बीसीआई के चेयरमैन मनन मिश्रा ने किया. इस बैठक के बाद बार काउंसिल के सदस्य ने मीडिया को बताया कि हम शाम को मुख्य न्यायाधीश और शेेष तीन जजों से मुलाकात करने के बाद ही इस मामले पर कुछ बोलेंगे. 

 

आपको बता दें कि देश की सर्वोच्च अदालत की प्रशासनिक गतिविधियों को लेकर उपजे विवाद और सवाल के बीच बार काउंसिल ऑफ  इंडिया ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) दीपक मिश्रा से मिलने का समय मांगा था. 

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बता दें कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने शनिवार (13 जनवरी) को उच्चतम न्यायालय के वर्तमान संकट पर चर्चा के लिए पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों को छोड़कर शीर्ष अदालत के अन्य सभी न्यायाधीशों से मिलने के लिए सात सदस्यीय दल का गठन किया. बीसीआई ने एक प्रस्ताव पारित करके कहा कि उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा संवाददाता सम्मेलन बुलाने से पैदा स्थिति का किसी राजनीतिक दल या नेता को अनुचित फायदा नहीं उठाना चाहिए. बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि बीसीआई ने वर्तमान स्थिति पर चर्चा के लिए पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों को छोड़कर उच्चतम न्यायालय के अन्य सभी न्यायाधीशों से मिलने के लिए सात सदस्यीय टीम का गठन किया है.

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वकीलों की शीर्ष संस्था ने कहा कि वह अन्य न्यायाधीशों की राय लेगी. बीसीआई का नजरिया है कि न्यायाधीशों के इस तरह के मुद्दे सार्वजनिक नहीं होने चाहिए. बार काउन्सिल ऑफ इंडिया ने कहा कि इस तरह के मुद्दों को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिये. रोस्टर या मामलों के आवंटन को लेकर न्यायाधीशों के बीच मतभेदों पर बीसीआई ने कहा कि विवाद चाहे जो भी हो, सार्वजनिक तौर पर राय जाहिर किये बिना अंदरूनी व्यवस्था के जरिये उसका समाधान किया जाना चाहिये.

उधर, न्यायपालिका प्रशासन पर उंगली उठाने वाले चार जजों में शामिल जस्टिस कुरियन जोसेफ ने भी साफ कर दिया है कि उनका किसी से कोई टकराव या विरोध नहीं है. उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, वे सब आपस में मिल-बैठकर सुलझा लिए जाएंगे. केरल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हम न्याय और न्यायपालिका के हित में खड़े हुए हैं. न्यायपालिका में लोगों का भरोसा जीतने के लिए यह किया.  

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उल्लेखनीय है कि न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए शुक्रवार (12 जनवरी) को एक संवाददाता सम्मेलन किया और कहा कि शीर्ष अदालत में हालात ‘सही नहीं हैं’ और कई ऐसी बातें हैं जो ‘अपेक्षा से कहीं कम’ थीं. प्रधान न्यायाधीश के बाद दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जे चेलमेश्वर ने कहा, ‘... कभी उच्चतम न्यायालय का प्रशासन सही नहीं होता है और पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई चीजें हुई हैं जो अपेक्षा से कहीं कम थीं.’