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सर्वाना भवन के संस्थापक पी राजगोपाल के सरेंडर की मियाद बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने राजगोपाल को 7 जुलाई तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था, लेकिन राजगोपाल ने मेडिकल ग्राउंड पर सरेंडर की मियाद बढ़ाने की मांग की थी.

सर्वाना भवन के संस्थापक पी राजगोपाल के सरेंडर की मियाद बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार
पी राजगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: दक्षिण भारतीय खाने के प्रसिद्ध रेस्टोरेंट चेन सर्वाना भवन के संस्थापक पी राजगोपाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर की मियाद बढ़ाने से इनकार कर दिया है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राजगोपाल को मद्रास हाईकोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था. सुप्रीम कोर्ट ने राजगोपाल को 7 जुलाई तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था, लेकिन राजगोपाल ने मेडिकल ग्राउंड पर सरेंडर की मियाद बढ़ाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने आज ठुकरा दिया.

उल्‍लेखनीय है कि राजगोपाल ज्योतिषी की सलाह पर कर्मचारी की बेटी से शादी करना चाहता था, ऐसा न होने पर लड़की के पति की हत्या करवा दी थी. दरअसल, पी राजगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. मद्रास हाईकोर्ट ने साल 2009 में पी राजगोपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसी केस में मद्रास हाईकोर्ट ने आठ अन्य दोषियों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

क्या है पूरा मामला
1990 में राजगोपाल की नजर अपने जीवाजोती नाम की एक महिला पर पड़ी थी. वह राजगोपाल के रेस्टोरेंट चेन में काम करने वाले पूर्व असिस्टेंट मैनेजर की बेटी थी. उस वक्त राजगोपाल की दो पत्नियां थीं और वह जीवाजोती से तीसरी शादी करना चाहता था. हालांकि, जीवाजोती ने शादी करने से इंकार कर दिया था. जीवाजोती ने राजगोपाल के प्रस्ताव को ठुकरा कर 1999 में एक पूर्व ट्यूशन टीचर शांताकुमार से शादी कर ली, जिसने बाद में सर्वना भवन रेस्टोरेंट में नौकरी शुरू कर दी. इसके बाद भी राजगोपाल ने कई बार शांताकुमार और उनकी पत्नी जीवाजोती को शादी तोड़ने के लिए धमकाया.

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हालांकि, दंपत्ति पर इन धमकियों का कोई फर्क नहीं पड़ा. इसके बाद एक अक्टूबर 2001 में दंपति ने राजगोपाल के खिलाफ पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने राजपोगाल के गुर्गों द्वारा उनका अपहरण करने और धमकाने का आरोप लगाया. इसके कुछ हफ्तों बाद 26 अक्टूबर 2001 को शांताकुमार का चेन्नई से अपहरण कर लिया गया था. उसके बाद उसी दिन उसकी हत्या कर दी गई थी.