ऑड-ईवन से कोई फायदा नहीं- CPCB, सुप्रीम कोर्ट ने चार राज्यों के मुख्य सचिव तलब किए

दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन का बचाव करते हुए कहा कि इससे 5-15% प्रदूषण घटा है जबकि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का कहना है कि हमारे अध्ययन के मुताबिक ऑड-ईवन से कोई फायदा नहीं हुआ. 

ऑड-ईवन से कोई फायदा नहीं- CPCB, सुप्रीम कोर्ट ने चार राज्यों के मुख्य सचिव तलब किए
फाइल फोटो

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में दिवाली के बाद से ही पॉल्यूशन (Pollution) खतरनाक स्तर पर बना हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण रोकने में नाकाम रहने पर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को तलब किया है. 29 नवंबर को सभी को कोर्ट में पेश होना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल कार पर ऑड ईवन लगाने से काम नहीं चलेगा. क्योंकि ये इतना प्रभावित नहीं हैं. यह सिर्फ़ मिडिल क्लास पर प्रभाव डालता है जबकि अमीरों के पास हर नंबर की कार है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन देशों में ऑड ईवन लागू है वहां पब्लिक ट्रांसपॉर्ट काफी मजबूत और फ्री है, लेकिन यहाँ नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को केंद्र से दिल्ली में जगह-जगह एयर प्यूरीफायर टावर लगाने पर विचार करने को कहा है. उधर, दिल्ली सरकार ने ऑड-इवन का बचाव करते हुए कहा कि इससे 5-15% प्रदूषण घटा है जबकि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) का कहना है कि हमारे अध्ययन के मुताबिक ऑड-Rवन से कोई फायदा नहीं हुआ. 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बंद कमरों में AQI बहुत खराब है जबकि बाहर हालत बदतर हैं. पिछले साल अक्टूबर में AQI ठीक था जबकि ऑड ईवन नहीं था. कोर्ट ने कहा आज भी AQI 600 है लोग कैसे सांस ले रहे हैं हालात बहुत गंभीर है. इसपर दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि ऑड-ईवन के कारण इस साल AQI और भी बेहतर है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऑड-ईवन, प्रदूषण की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो सकता.

केंद्र सरकार ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण का डेटा लेकर एक हलफनामा दाखिल किया. इसके अलावा सरकार ने SC को बताया कि दिल्ली में एयर प्यूरीफायर टावर 'वायु' लगाया गया है. जिसका ट्रायल चल रहा है. ट्रायल में कम से कम 1 साल का समय लगेगा. 

केंद्र ने IIT बॉम्बे के प्रोफेसर का हवाला देते हुए कहा कि टॉवर 1 किलो मीटर के दायरे में हवा साफ करेगा. IIT बॉम्बे के प्रोफेसर ने चीन में जैसा टावर लगा है वैसा ही टावर लगाने का सुझाव दिया है.

इसपर जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि कोई और टेक्नोलॉजी ढूंढ़िए जो कम से कम 10 किलो मीटर की रेंज में हवा साफ कर सके. 

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