सरवण भवन के मालिक को उम्रकैद की सजा, कर्मचारी की पत्नी से शादी के लिए करवाई थी हत्या

मद्रास हाईकोर्ट ने साल 2009 में पी राजगोपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसी केस में मद्रास हाईकोर्ट ने आठ अन्य दोषियों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

सरवण भवन के मालिक को उम्रकैद की सजा, कर्मचारी की पत्नी से शादी के लिए करवाई थी हत्या
फाइल फोटो

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दक्षिण भारतीय खाने के प्रसिद्ध रेस्टोरेंट चेन सरवण भवन (Saravana Bhavan) के संस्थापक पी राजगोपाल को मद्रास हाईकोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने राजगोपाल को 7 जुलाई तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है. राजगोपाल ज्योतिषी की सलाह पर कर्मचारी की पत्नी से शादी करना चाहता था, ऐसा न होने पर उसने अपने कर्मचारी की हत्या करवा दी थी. दरअसल, पी राजगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी.

मद्रास हाईकोर्ट ने साल 2009 में पी राजगोपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसी केस में मद्रास हाईकोर्ट ने आठ अन्य दोषियों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

क्या है पूरा मामला
साल 1990 में राजगोपाल की नजर उसके रेस्टोरेंट चेन में काम करने वाले असिस्टेंट मैनेजर की बेटी जीवाजोती पर पड़ी. उस वक्त भी राजगोपाल की दो पत्नियां थी. लेकिन वह एक ज्योतिष के कहने पर तीसरी शादी करना चाहता था. हालांकि जीवाजोती ने राजगोपाल के साथ शादी करने से इंकार कर दिया. 1990 में जीवाजोती की शादी ट्यूशन टीचर शांताकुमार के साथ हुई. शांताकुमार ने बाद में राजगोपाल की रेस्टोरेंट चेन सर्वाना भवन में ही नौकरी कर ली. कुछ समय बाद राजगोपाल शांताकुमार और जीवाजोती पर शादी तोड़ने के लिए दबाब बनाने लगा.

उसके कई बार दोनों को धमकाया भी, लेकिन जीवा और शांता नहीं माने. दोनों ने अक्टूबर 2001 में राजगोपाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई. इस शिकायत में राजगोपाल और उसके लोगों पर धमकाने अपहरण करने का आरोप लगाया. इसके कुछ दिनों बाद ही चेन्नई में शांताराम का अपहरण कर लिया गया था और बाद में हत्या कर दी गई थी.

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