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दागी नेताओं के राजनीतिक दल बनाने पर रोक की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को करेगा सुनवाई

बीजेपी प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने दागी नेताओं के पार्टी बनाने या उसमें रहने पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2017 में जवाब मांगा था.

दागी नेताओं के राजनीतिक दल बनाने पर रोक की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को करेगा सुनवाई
फाइल फोटो

नई दिल्ली: दागी नेताओं के पार्टी बनाने या फिर पार्टी में रहने पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा. सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. दरअसल, बीजेपी प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को राजनीतिक पद पर रहने या फिर पार्टी बनाने से रोकने की मांग की थी. इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने से नहीं रोका जा सकता है.

केंद्र सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि वह जानती है कि राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए चुनावी सुधार की आवश्यकता है और इसलिए इस तरह के किसी भी आदेश को पारित न किया जाए, जिसमें आपराधिक संलिप्तता हो. सरकार ने कोर्ट में कहा कि मौजूदा कानून के तहत राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए. हालांकि जनप्रतिनिधित्व कानून या आपराधिक कानून के तहत सजायाफ्ता किसी व्यक्ति के संसद या राज्यों के विधानसभा चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने या उनके किसी पार्टी के सदस्य बनने या पार्टी का गठन करने के बीच कोई गठजोड़ नहीं दिखता है.

आपको बता दें कि बीजेपी प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने दागी नेताओं के पार्टी बनाने या उसमें रहने पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2017 में जवाब मांगा था. याचिका में कहा गया था कि अभी हत्या या बलात्कार का आरोपी भी राजनीतिक पार्टी बना सकता है और पार्टी का अध्यक्ष भी बन सकता है. चूंकि पार्टियां और नेता जनता की सेवा के लिए होती हैं, इसलिए जरूरी है कि वे पारदर्शी हों.