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सूरत: स्कूल संचालक ने की थी 60 रुपये की मदद, 64 साल बाद स्कूल को दिए एक करोड़ रुपये

वैसे तो लोग छोटे-छोटे एहसानों को बड़ा होने के बाद भूल जाते हैं लेकिन सूरत के एक स्कूल के ट्रस्टी द्वारा एक बच्चे को 60 रुपये की फ़ीस भरने के लिए मदद की गई थी. उस बच्चे ने 64 साल तक उसे याद रखा और अब उसी स्कूल को एक करोड़ तीन लाख रुपये का दान दिया है. 

सूरत: स्कूल संचालक ने की थी 60 रुपये की मदद, 64 साल बाद स्कूल को दिए एक करोड़ रुपये
बकुल भाई ने अपनी पत्नी की स्कूल में भी 55 लाख रुपये की आर्थिक मदद की थी.

सूरत: सूरत में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनने के बाद हर कोई दंग है. वैसे तो लोग छोटे-छोटे एहसानों को बड़ा होने के बाद भूल जाते हैं लेकिन सूरत के एक स्कूल के ट्रस्टी द्वारा एक बच्चे को 60 रुपये की फ़ीस भरने के लिए मदद की गई थी. उस बच्चे ने 64 साल तक उसे याद रखा और अब उसी स्कूल को एक करोड़ तीन लाख रुपये का दान दिया है. वो भी तब जब उस स्कूल की आर्थिक हालात ख़राब होने लगी.
 
विदेश में रहने वाले 77 वर्षीय बकुल भाई झवेरी बचपन में अपनी आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से पढाई करने में असर्थ थे. तब स्कूल संचालक ने उनकी पढ़ाई के लिए 60  रुपये की मदद की थी. सक्षम होने के बाद बकुल भाई ने 64  साल बाद स्कूल संचालक का एहसान मानते हुए एक करोड़ तीन लाख रुपये लौटाए हैं.

बकुलभाई झावेरी के माता-पिता का देहावसान बचपन में ही हो गया था. वह अनाथ हो गए और अपने चाचा के यहां 1954 में रहने आ गए थे. उनके चाचा के घर पर भी पांच बहनें और दो भाई थे. साथ ही दादा-दादी-और चाचा-चाची भी साथ थे. इतना बड़ा परिवार होने की वजह से इस परिवार की आर्थिक स्थिति काफी ख़राब थी. इस वजह से उनके चाचा बकुल भाई की फ़ीस भरने की स्थिति में नहीं थे. लेकिन उन्हें पढ़ना था. यूनियन स्कूल के ट्रस्टी जगदीश भाई झावेरी ने अपनी तरफ से फ़ीस का कुछ हिस्सा मदद के रूप में देने का आश्वासन दिया. चार साल की फ़ीस 120 रुपये हो रही थी. 60 रुपये जगदीश भाई ने दिए और बाकी पैसे बकुल भाई ने जुटाए. बकुल भाई ने MTB साइंस कॉलेज में पढाई की. पढ़ने में होशियार बकुलभाई ने आणंद स्थित बिरला विश्वकर्मा महाविधालय में सिविल इंजीनियरिंग पूरी की. पढाई पूरी करने के बाद विदेश में नौकरी करने का मौका मिला और वह पहले यूरोप में नौकरी करने के लिए गए. उसके बाद अमेरिका के कई शहरों में बकुल भाई ने सिविल इंजीनियरिंग के रूप में काम किया और शादी करने वहीं पर रहने लगे.
 
इस दौरान उन्हें स्कुल के ट्रस्टी जगदीश भाई झवेरी की मदद याद रही. बकुल भाई 40 साल बाद सूरत आए और स्कूल के ट्रस्टी से मिले. बकुल भाई द्वारा स्कुल को एक करोड़ और तीन लाख रुपये का दान दिया. बकुल भाई की इच्छा है कि इस रकम का उपयोग स्कूल में पढ़ने वाले गरीब और जरुरतमंद छात्रों के लिए फ़ीस माफ़ी, स्कूल यूनिफॉर्म, किताबें, नोटबुक देने में किया जाए. यह सब जगदीश भाई के नाम से दिया जाए जिन्होंने उनकी बचपन में मदद की थी. बकुल भाई ने अपनी पत्नी की स्कूल में भी 55 लाख रुपये की आर्थिक मदद की थी. 

बकुल भाई ने बताया कि वह रामकृष्ण मिशन के साथ जुड़े हुए हैं, जहां उनको यह सिखने मिलता है कि जिसने भी आपको आपके ख़राब समय में मदद की हो, उसे आपके अच्छे समय में उस ऋण को चुकाना चाहिए. बस यही बात को ध्यान में रखते हुए मैंने निश्चय किया कि मैं अपने उसी स्कूल का ऋण चुकाऊंगा जिसमें बचपन में पढ़ाई की थी. स्कूल के ट्रस्टी सुनील मोदी ने कहा की फ़िलहाल स्कूल की परिस्थिति ख़राब है. बकुलभाई द्वारा की गयी आर्थिक मदद स्कूल के लिए काफी महत्वपूर्ण है. इस आर्थिक सहयोग का उपयोग हम आर्थिक रूप से कमजोर बच्चो के लिए करेंगे.