पश्चिम बंगाल में क्या हिंदू जेल जाएंगे और कट्टरपंथी जश्न मनाएंगे. सवाल बहुत सीधा और तीखा है. पिछले एक हफ्ते में ममता बनर्जी सरकार की पुलिस ने ऐसे सेलेक्टिव एक्शन लिए हैं जिससे ये सवाल बार-बार उठाया जा रहा है.
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योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कट्टरपंथियों का तुष्टीकरण नहीं किया. पहले कानूनी तौर पर उन्हें सजा दिलाई, फिर उनके फेंके पत्थरों से पुलिस स्टेशन बनाकर संदेश दे दिया है कि अब अगर पत्थर उठाया तो कार्रवाई और कठोर होगी. क्योंकि ये कानून का राज है. कानून के राज में सभी बराबर होते हैं. लेकिन जब कानून को किसी मेरिट पर नहीं, बल्कि लाभ और हानि के नजरिए से लागू किया जाए तो अन्याय होता है. सवाल उठते हैं. यही सवाल आजकल पश्चिम बंगाल में भी उठ रहे हैं.
पश्चिम बंगाल में क्या हिंदू जेल जाएंगे और कट्टरपंथी जश्न मनाएंगे. सवाल बहुत सीधा और तीखा है. पिछले एक हफ्ते में ममता बनर्जी सरकार की पुलिस ने ऐसे सेलेक्टिव एक्शन लिए हैं जिससे ये सवाल बार-बार उठाया जा रहा है. सोचिए क्या मंत्रपाठ वाले आयोजन स्थल पर मांसाहारी सामग्री बेचना सही है. क्या अपनी आस्था पर आघात करने वालों से सवाल पूछना गलत है. 7 दिसंबर को कोलकाता के बिग्रेड परेड गाउंड पर गीता पाठ का आयोजन किया गया था. लाखों की भीड़ जुटी थी. ऐसे आयोजन स्थल के आसपास व्यापार के लिए लोग स्टॉल भी लगाते है. यहां भी कई दुकानदारों ने स्टॉल लगाया था.
छोटी-छोटी घटनाओं पर सियासत हो रही
दो दुकानदारों से कुछ लोगों ने मारपीट की. पुलिस ने मारपीट करनेवालों को गिरफ्तार किया. उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई. मारपीट करना गलत है. कानून ने अपना काम किया. लेकिन इस घटना पर राजनीति हो रही है. सुनिए पुलिस के एक्शन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने क्या कहा? अब वो बुनियादी सवाल कि आखिर इन दुकानदारों से मारपीट क्यों हुई. ध्यान से सुनिएगा और फिर समझिएगा की ममता बनर्जी पर क्यों तुष्टीकरण का आरोप लगता है. जिन दो दुकानदारों से मारपीट हुई, उन्होंने ब्रिगेड परेड ग्राउंड के बाहर नॉन-वेज का स्टॉल लगाया था. ये चिकन पेटीज बेच रहे थे. इन दोनों ने खुद माना है कि जहां पवित्र गीता का पाठ हो रहा था, वहां वो मांसाहारी भोजन बेच रहे थे.
सनातनियों को चोट पहुंचाने वाला काम क्यों
सोचिए ये कैसे लोग थे जिन्हें दूसरों की आस्था का ख्याल तक नहीं था. हम सभी जानते हैं कि पूजा-पाठ, मंत्रोच्चार जैसे आयोजन में पवित्रता का बेहद ख्याल रखा जाता है. हर सनातनधर्मी स्नान कर, साफ वस्त्र पहन कर ही इसमें शामिल होते हैं. हम सभी जानते हैं पवित्रता सिर्फ वस्त्रों तक ही नहीं होती, विचारों की भी होती है. इसलिए मंत्रोच्चार और पूजा पाठ के आयोजन से कई दिन पहले से ही सनातनधर्मी आहार की पवित्रता का भी पालन करते हैं. सोचिए ऐसे पवित्र आयोजन के बाहर मांसाहारी भोजन का स्टॉल. मतलब ये कैसी मानसिकता वाले, किस सोच वाले लोग हैं. भारत का एक साधारण नागरिक भी जानता है कि पूजा-पाठ स्थल की परिधि में मांसाहार की चर्चा भी वर्जित है. फिर इन्होंने गीता पाठ स्थल के बाहर नॉन-वेज का स्टॉल क्यों और कैसे लगाया. क्या ममता जी की पुलिस ने इनसे पूछा कि पवित्र आयोजन स्थल के बाहर ये सनातनियों की आस्था को चोट पहुंचाने वाला काम क्यों कर रहे थे.
पश्चिम बंगाल की पुलिस धर्म और जाति देखकर कार्रवाई करती है
मारपीट करनेवालों पर कार्रवाई हई. ये सही है, होनी भी चाहिए. लेकिन ममता जी की पुलिस अगर न्याय के मूलभूत सिद्धांत का पालन करती तो जरूर उन दो दुकानदारों पर भी कार्रवाई होती जिन्होंने सनातनियों की आस्था पर चोट की है. उन्हें भी सनातनियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जानते हैं ऐसा क्यों नहीं हुआ क्योंकि जिन्हें पीड़ित बताया जा रहा है वो मुसलमान हैं. इसलिए वो कानूनी कार्रवाई से बच गए. ममता जी ने सही कहा है. ये पश्चिम बंगाल है इसलिए वहां पुलिस भी नाम पूछकर और धर्म देखकर कार्रवाई करती है. अगर कोई दूसरा प्रदेश होता तो जरूर मारपीट करनेवालों के साथ ही नॉन-वेज बेचनेवालों पर भी कार्रवाई होती. उन्हें भी कानून बताता कि दूसरे की आस्था को ठेस पहुंचाना अपराध है. लेकिन पश्चिम बंगला है इसलिए ये कट्टरपंथी मासूस और पीड़ित बताए जा रहे हैं. पश्चिम बंगाल में कट्टरपंथियों को खुली छूट है. वो सनातनियों को चिढ़ा सकते हैं. मनमानी कर सकते हैं और फिर जमकर दावत भी उड़ा सकते हैं.
आज हजारों कट्टरपंथी जुमे की नमाज के लिए बाबरी पहुंचे
आज शुक्रवार का दिन है. शुक्रवार को नई फिल्म रिलीज होती है. पिछले हफ्ते शुक्रवार के दिन ही हुमायूं कबीर ने बेलडांगा में अपना नया बाबरी प्रोजेक्ट लॉन्च किया था. ये फिल्म नहीं है. लेकिन इस प्रोजेक्ट की कहानी पूरी फिल्मी है. पहले हफ्ते की कलेक्शन देखकर किसी फिल्म को हिट या फ्लॉप घोषित किया जाता है. तो एक हफ्ते में बेलडांगा से जो रुझान आए हैं वो बता रहे हैं कि धार्मिक अतिवादियों के बीच हुमायूं कबीर का नई बाबरी प्रोजेक्ट चर्चित हो गया है. 6 दिसंबर को हुमायूं कबीर ने बेलडांगा में जिस जगह पर नई बाबरी के शिलान्यास का दावा किया था. आज वहां भीड़ उमड़ी. शिलान्यास के बाद आज पहला जुमा था. इसलिए नई बाबरी वाली जमीन पर आज बड़ी तैयारी थी. आसपास से हजारों की संख्या में कट्टरपंथी नई बाबरी प्रोजेक्ट का मुआयना करने पहुंचे. आज जुमा था इसलिए नमाज भी पढ़ी गई. उसके बाद दावत हुई. पहले आपको इस दावत की एक वीडियो रिपोर्ट दिखाते हैं
बेलडांगा में 6 दिसंबर के बाद का ये पहला जुमा
बेलडांगा में 6 दिसंबर के बाद का ये पहला जुमा था. आसपास के सैकड़ों हुमायूं भक्त उस जगह पहुंचे चहां नई बाबरी का शिलान्यास हुआ था. नई बाबरी के नाम पर अपना सियासी एजेंडा चला रहे हुमायूं कबीर और उनकी टीम को पहले से मालूम था कि भीड़ जुटेगी. इसलिए सुबह से तैयारी चल रही थी. कहीं सब्जी काटी जा रही थी. तो खिचड़ी बनाने के लिए पतीले में चावल चढ़ाया गया था. सुबह से ही नई बाबरी वाली साइट्स पर लोग पहुंचाने लगे थे. देखते-देखते सैकड़ों की भीड़ हजारों में बदल गई. उसके बाद खेत में जुमे की नमाज पढ़ी गई.
हुमायूं कबीर ने बिरयानी की दावत का ऐलान किया था लेकिन...
नमाज के बाद दावत हुई. हुमायूं कबीर ने वैसे तो बिरयानी की दावत का ऐलान किया था. लेकिन आज सिर्फ खिचड़ी और सब्जी का ही बंदोबस्त था. करीब दो हजार लोगों के लिए खाने की व्यवस्था की गई थी. लेकिन मौके पर ज्यादा लोग पहुंच गए इसलिए अफरा-तफरी भी हुई. भगदड़ ना हो इसके लिए बार-बार माइक से ऐलान हो रहा था. लोगों से शांत रहने की अपील की जा रही थी. किसी के हाथ में प्लास्टिक की कटोरी थी, कोई पत्तल में खिचड़ी लेने पहंचा तो जिसे कुछ नहीं मिला उसने बोतल को ही बर्तन बना लिया और खिचड़ी की दावत उड़ाई.
बाबरी की खिचड़ी के लिए हुमायूं समर्थकों ने मचाई लूट
सोचिए, बाबरी की खिचड़ी के लिए. हुमायूं के अनुयायियों ने ऐसी लूट मचा दी अगर बाबरी की बिरयानी बंटती..तो क्या होता, आप इन तस्वीरों को देखकर समझ सकते हैं. खैर, आज बेलडांगा में अपने वैचारिक बंधुओं के बीच हुमायूं कबीर भी मौजूद थे. हुमायूं की टीम ने मौके पर दान बॉक्स भी लगाए थे. जैसे चतुर बिल्डर सैंपल फ्लैट बनाकर पूरा प्रोजेक्ट बेच देता है. वैसे ही हुमायूं कबीर ने नई बाबरी की जमीन दिखाकर कट्टरपंथियों के धार्मिक उन्माद को भड़का दिया है. अब हुमायूं कबीर का लक्ष्य 300 करोड़ रुपए का चंदा जुटाना है.
अब तक हुमायूं कबीर को बाबरी के नाम पर 4 करोड़ से ज्यादा का चंदा
अब तक हुमायूं कबीर को नई बाबरी के नाम पर 4 करोड़ से ज्यादा का चंदा मिल चुका है. क्या पता इसी पैसे से हुमायूं ने खिचड़ी वाली दावत दी हो. क्योंकि अभी तो उनकी नई बाबरी फिलहाल कागज पर ही है. मित्रो समझिए नई बाबरी जब बनेगी तब बनेगी. लेकिन उससे पहले हुमायूं कबीर अपनी नई पार्टी ल़ॉन्च करने वाले हैं. पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव में हुमायूं अपनी पार्टी के बैनर तले उम्मीदवार उताएंगे. इसलिए जब तक नई बाबरी के नाम पर उनका तमाशा चलता रहेगा वो चर्चा में रहेंगे. कट्टरपंथियों के बीच उनकी इमेज मजबूत होगी और चंदा भी मिलता रहेगा. यानी हुमायूं कबीर ने एक मंझे हुए नेता की तरह ऐसी रणनीति बनाई है जिससे सिर्फ उनका फायदा होगा. उनका प्लान नई बाबरी बनाने का कम औऱ अपनी पार्टी के लिए वोट बैंक बनाने का ज्यादा है. जानते हैं हम ऐसा क्यों कह रहे हैं. क्योंकि जिस नई बाबरी का फीता 6 दिसंबर को हुमायूं कबीर ने काटा था उसपर कानूनी हथौड़ा चल सकता है.
अर्नब घोष ने कहा नई बाबरी से सांप्रदायिक सद्भाव को खतरा
कलकत्ता हाई कोर्ट में एक और जनहित याचिका दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों से आवश्यक अनुमति के बिना ही नई बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया गया. इसके लिए जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं ली गई. याचिका दायर करनेवाले अर्नब कुमार घोष ने कहा है कि नई बाबरी से सांप्रदायिक सद्भाव को खतरा है. कोर्ट में जल्द ही इस याचिका पर सुनवाई हो सकती है. अगर अदालत याचिकाकर्ता के तर्कों से सहमत हुई तो हुमायूं कबीर के इस कट्टरपंथी प्रोजेक्ट पर कानून का हथौड़ा भी चल सकता है.
नई बाबरी पर कानूनी हथौड़ा चलने का संकट
नई बाबरी प्रोजेक्ट पर कानूनी हथौड़ा चलने का संकट है. इसी बीच पश्चिम बंगाल में राम मंदिर का पोस्टर भी आ गया है. कोलकाता में कई जगहों पर राम मंदिर के ये पोस्टर लगाए गए है. साल्ट लेक इलाके के करुणामयी, सिटी सेंटर समेत कई जगहों पर ये पोस्टर लगाए गए हैं. एक बार इस पोस्टर को आपको BIG WALL पर दिखाते हैं. देखिए राम मंदिर की भव्य तस्वीर के साथ पोस्टर पर विधाननगर में राम मंदिर बनाने की बात कही गई है. साथ ही अस्पताल पर स्कूल भी बनाने की योजना है. इसमें संयोजक की तौर पर संजय पोइरा का नाम है.
26 मार्च 2026 को राम नवमी पर मंदिर का शिलान्यास
संकल्प बिघान नगर में 4 बिघा जमीन पर भव्य राम मंदिर बनाने का है. 26 मार्च 2026 को राम नवमी पर मंदिर का शिलान्यास होगा.देश के हर धर्म के माननेवालों को अपना पूजास्थल बनाने का अधिकार है. लेकिन पश्चिम बंगा में कानून जिस अंदाज में काम कर रहा है. उसे देखते हुए हम यही कहना चाहेंगे की रामभक्तो को सावधान रहने की जरूरत है. क्या पता कल को कोई कट्टरपंथी राम मंदिर के पोस्टर के खिलाफ शिकायत कर दे. वो कह दे कि इस पोस्टर से मेरी धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची है और ममता जी की पुलिस पोस्टर जारी करनेवालों के जेल भेज दे.
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