Teacher's Day: गूगल ने शिक्षक दिवस पर डूडल बनाकर किया टीचर्स का सम्मान

गूगल ने एनिमेटेड डूडल बनाकर टीचर्स का सम्मान किया है. 

Teacher's Day: गूगल ने शिक्षक दिवस पर डूडल बनाकर किया टीचर्स का सम्मान
टीचर्स डे पर गूगल का स्पेशल डूडल.

नई दिल्ली: आज (5 सितंबर को) देशभर में टीचर्स डे मनाया जा रहा है. हमें शिक्षा देकर जीवन का मार्गदर्शन करने वाले शिक्षकों के प्रति गूगल ने खास तरीके से सम्मान प्रकट किया है. इस मौके पर गूगल ने एनिमेटेड डूडल बनाकर टीचर्स का सम्मान किया है. गूगल द्वारा तैयार किए गए इस डूडल में GOOGLE में पहले लेटर G को ग्लोब का शेप दिया गया है. यह ग्लोब घूमते हुए रुक जाता है और फिर चश्मा पहने टीचर जैसा नजर आता है. इसके बाद इसमें से कई अलग-अलग रंग के बुलबुले निकलते नजर आ रहे हैं जो कि गणित, विज्ञान से लेकर संगीत और खेल तक का संकेत दे रहे हैं. 

क्यों मनाते हैं शिक्षक दिवस
भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन यानी कि 5 सितंबर को टीचर्स डे के रूप में मनाया जाता है. ये दिन अपने गुरुओं और शिक्षकों के प्रति प्यार और सम्मान प्रकट करने के लिए होता है. राधाकृष्णन प्रख्यात शिक्षाविद और महान दार्शनिक थे. पांच सितंबर 1888 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव तिरुमनी के एक ब्राह्मण परिवार में जब सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन वह देश के राष्ट्रपति बनेंगे और उनके सम्मान में पूरा देश शिक्षक दिवस मनाएगा.

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आपको बता दें कि 1962 में राधाकृष्णन के राष्ट्रपति बनने के बाद उनके सम्मान में लोगों ने 5 सितंबर के को 'राधाकृष्णन दिवस' के तौर पर मनाने का फैसला किया. हालांकि वह इससे सहमत नहीं थे इसलिए उन्होंने 5 सितंबर को अपने जन्मदिन की बजाय शिक्षक दिवस के तौर पर मनाने का प्रस्ताव पेश किया. इसके बाद से ही हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है.

भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के सम्मान में पांच सितंबर 1962 को शिक्षक दिवस के रूप में मनाता गया.  1962 में ही उन्हें ब्रिटिश एकेडमी का सदस्य बनाया गया. डॉ. राधाकृष्णन अपने राष्ट्रप्रेम के लिए विख्‍यात थे. इंग्लैंड की सरकार ने उन्हें 'ऑर्डर ऑफ मेरिट' स्म्मान से सम्मानित किया. राधाकृष्णन का निधन 17 अप्रैल 1975 को हो गया. उनके मरणोपांत 1975 में अमेरिकी सरकार ने उन्हें टेम्पल्टन पुरस्कार से सम्मानित किया. शिक्षा और राजनीति के क्षेत्र में उनके योगदाने के लिए भारत सरकार ने मरणोपरांत उन्हें 1984 में भारत रत्न से सम्मानित किया था.