शिक्षक दिवस : विद्यार्थी कर रहे हैं अपने शिक्षकों को याद

शिक्षक वह माध्यम है जो विद्यार्थियों के आने वाले भविष्य का सृजन करता है.

शिक्षक दिवस : विद्यार्थी  कर रहे हैं अपने शिक्षकों को याद

नई दिल्ली: शिक्षकों को विद्यार्थियों के जीवन का सृजन करने और उसे सही रास्ता दिखाने और एक आयाम देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है. भारत की संस्कृति में शिक्षकों को सदैव महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है. अज्ञानता को दूर करने और ज्ञान का सृजन करने वाले शिक्षकों के योगदान को पूरा देश आज याद कर रहा है. आज पूरा देश महान शिक्षाविद सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के मौके पर पूरे उत्साह के साथ शिक्षक दिवस मना रहा है. देश के प्रसिद्ध  शिक्षाविद ,राजनीतिज्ञ और दार्शनिक के रूप में विख्यात एस राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षक वह माध्यम है जो विद्यार्थियों को आने वाले भविष्य का सृजन  करने में मदद करता है.

तमिलनाडु के तिरुतनी में 1888 को जन्मे राधाकृष्णन ने भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति भी बने. इससे पूर्व एस राधाकृष्णन ने देश के प्रमुख मैसूर विश्वविद्यालय और कलकत्ता विश्वविद्यालय में भी अध्यापन का कार्य किया था.उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड  यूनिवर्सिटी में भी अध्यापन कार्य किया था. महान शिक्षाविद के रूप में पहचाने जाने वाले सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद बीएचयू के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय के निवेदन पर 1939 में कुलपति के रूप में योगदान किया.

दर्शनशास्त्र के ज्ञाता और अद्वैत मत के अनुसार उसकी विवेचना करने वाले एस राधाकृष्णन का मानना था कि पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव को रोक कर सनातन हिन्दू संस्कृति को बनाये रखा जा सकता है. राधाकृष्णन की गीता, उपनिषद और वेद की विवेचना की वजह से पूरे विश्व में उन्हें एक प्रमुख दार्शनिक के रूप में ख्याति प्राप्त हुई. उन्होंने दर्शन पर की गई अपनी विवेचना के माध्यम से पूर्व को पश्चिम से जोड़ने का प्रयास किया.

इसके अलावा उन्होंने एक कूटनीतिज्ञ के रूप में भी काफी अहम् योगदान दिया था. भारत को 1947 में मिली आजादी के बाद उन्हें रूस में देश का राजदूत बना कर भी भेजा गया था. प्रसिद्ध शिक्षाविद् सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को 1962 से हर वर्ष पूरे देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है.