कश्मीर में आतंकवादियों ने बदले ठिकाने, अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां

सूत्रों के मुताबिक अनंतनाग का आतंकवादी अशरफ मौलवी अपने कुछ साथियों के साथ किश्तवाड़ पहुंचा है. 

कश्मीर में आतंकवादियों ने बदले ठिकाने, अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां
(प्रतीकात्मक तस्वीर )

श्रीनगर: दक्षिण कश्मीर (South Kashmir) से कुछ आतंकवादियों (Terrorists) ने पीर पंजाल के दक्षिण में किश्तवाड़ (Kishtwar) के जंगलों का रुख किया है. इस खबर ने सुरक्षा एजेंसियों को और भी चौकन्ना कर दिया है कि दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा बलों के दबाव से परेशान आतंकवादी अब अपना इलाका और रणनीति दोनों बदल रहे हैं. पीर पंजाल के दक्षिण के डोडा और किश्तवाड़ जिलों में पिछले एक दशक से आतंकवादियों का सफाया हो गया था. लेकिन पिछले दो सालों से यहां आतंकवाद को दोबारा पैदा करने की कोशिश की जा रही है. 

सूत्रों के मुताबिक अनंतनाग का आतंकवादी अशरफ मौलवी अपने कुछ साथियों के साथ किश्तवाड़ पहुंचा है. इसको पाकिस्तान से इस इलाके में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को संगठित करने और नई भर्ती के आदेश मिले हैं. डोडा और किश्तवाड़ में पिछले दो सालों से आतंकवाद की कई घटनाएं हुई हैं. चार दिन पहले 17 मई को सुरक्षा बलों ने डोडा में पुलवामा के रहने वाले हिजबुल आतंकवादी ताहिर अहमद भट को मार गिराया था. 

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उससे पहले 5 मई को डोडा में ही आतंकवादियों के मददगार तनवीर मलिक को पकड़ा गया था और उससे वायरलेस सेट के साथ हथियार बरामद हुए थे. इस साल की शुरुआत में 15 जनवरी को डोडा से ही हारून अब्बास नामक आतंकवादी को मारा गया था. 

डोडा और किश्तवाड़ के इलाकों में आज से 20 साल पहले आतंकवादियों ने बड़ा अड्डा बना लिया था. 2006 के अप्रैल में यहां आतंकवादियों ने 35 हिंदुओं का कत्लेआम भी किया था. सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई और आम लोगों के सहयोग से एक दशक पहले इस इलाके को आतंकवाद से मुक्त करा लिया गया था. लेकिन नवंबर 2018 में किश्तवाड़ में बीजेपी नेता अनिल परिहार और उनके भाई की हत्या ने आतंकवादियों की मौजूदगी दोबारा साबित कर दी.

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2019 अप्रैल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य चंद्रकांत शर्मा और उनके सुरक्षा गार्ड को भी आतंकवादियों ने मार डाला. इसके बाद से यहां सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है. कश्मीर घाटी से उलट इस इलाके में ऊंचे पहाड़, घाटियां और घने जंगल सुरक्षा बलों की परेशानी बढ़ा देते हैं. दक्षिण कश्मीर से यहां आने के लिए आतंकवादियों को केवल एक पास पार करना होता है उसके बाद वो यहां के जंगलों में आसानी से छिप जाते हैं. पिछले दो सालों में यहां नए आतंकवादियों की भर्ती की भी कई घटनाएं सामने आई हैं, हालांकि उनमें से ज्यादातर सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए.