सैन्य हेलीकॉप्टरों के लिए साब और अडाणी के बीच समझौता, देश को मिलेगा फायदा

स्वीडन की रक्षा इकाई साब और भारत के अडाणी समूह ने मानवरहित वायु यान और हेलीकॉप्टरों के विनिर्माण के लिए हाथ मिलाया गया है. इसके अलावा वे भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के सौदे पर भी ध्यान लगाए हुए हैं. 

सैन्य हेलीकॉप्टरों के लिए साब और अडाणी के बीच समझौता, देश को मिलेगा फायदा
अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन इस सौदे के लिए साब की मुख्य प्रतिस्पर्धी होगी.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: स्वीडन की रक्षा इकाई साब और भारत के अडाणी समूह ने मानवरहित वायु यान और हेलीकॉप्टरों के विनिर्माण के लिए हाथ मिलाया गया है. इसके अलावा वे भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के सौदे पर भी ध्यान लगाए हुए हैं. अडाणी समूह के रक्षा एवं एयरोस्पेस प्रभाग के प्रमुख आशीष राजवंशी ने कहा कि दोनों समूहों के संयुक्त उपक्रम का पूरा ध्यान इस ओर है कि घरेलू एवं निर्यात बाजारों के लिए एयरोस्पेस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर विनिर्माण के लिए ‘बुनियादी क्षमताएं’ विकसित की जाएं. बीते सितंबर महीने में साब और अडाणी समूह ने अरबों डॉलर के निविश के साथ रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में गठजोड़ का ऐलान किया था और कहा था कि अगर एकल इंजन विमान सौदा मिलता है तो संयुक्त उपक्रम के माध्यम से भारत में ग्रिपेन सैन्य विमान का विनिर्माण किया जायेगा.

साब समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (भारत) जान वाइडस्ट्रोम ने भी कहा कि संयुक्त उपक्रम सिर्फ विमान सौदे की ओर ध्यान नहीं लगा रहा, बल्कि दूसरे क्षेत्रों में संभावना तलाश रहा है. राजवंशी और वाइडस्ट्रोम ने कहा कि संयुक्त उपक्रम का लक्ष्य मानवरहित वायु यान, सैन्य हेलीकॉप्टर और कई दूसरे उपकरणों के विनिर्माण करना है.

यह भी पढ़े- अरुणाचल प्रदेश: भारतीय वायुसेना का MI-17 हेलीकॉप्‍टर क्रैश, 7 की मौत

राजवंशी ने पीटीआई-भाषा से कहा,‘‘अगर ग्रिपेन का सौदा नहीं होता है तो कोई बात नहीं. हमने बुनियादी क्षमताओं के निर्माण की यात्रा शुरू की है. हम मानवरहित वायु यान कार्यक्रम, हेलीकॉप्टर कार्यक्रम को आगे बढ़ाएंगे. ’’सरकार ने वायुसेना के लिए एकल इंजन विमानों की खरीद के लिए जल्द प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है. अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन इस सौदे के लिए साब की मुख्य प्रतिस्पर्धी होगी.