सेना अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के कामिकाज़े ड्रोन शहरी इलाकों में बड़े नुकसान की क्षमता रखते हैं, लेकिन भारतीय वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों ने इन्हें निष्क्रिय कर दिया. यह प्रदर्शन देश की सुरक्षा तैयारियों और तकनीकी क्षमता का प्रतीक माना जा रहा है.
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भारतीय सेना ने 54वें विजय दिवस समारोह के अवसर पर एक तुर्की में निर्मित YIHA कामिकाज़े ड्रोन का सार्वजनिक प्रदर्शन किया. यह वही ड्रोन है जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान भारतीय शहरों को निशाना बनाने के लिए किया था. सेना के अनुसार, इस ड्रोन को पाकिस्तान की ओर से किए गए हमलों के दौरान भारतीय सेनाओं ने सफलतापूर्वक मार गिराया था. विजय दिवस के मौके पर इस ड्रोन को प्रदर्शित करने का उद्देश्य न सिर्फ ऐतिहासिक जीत को याद करना था, बल्कि यह भी दिखाना था कि भारतीय सुरक्षा बल किसी भी आधुनिक खतरे से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं.
सेना अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के कामिकाज़े ड्रोन शहरी इलाकों में बड़े नुकसान की क्षमता रखते हैं, लेकिन भारतीय वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों ने इन्हें निष्क्रिय कर दिया. यह प्रदर्शन देश की सुरक्षा तैयारियों और तकनीकी क्षमता का प्रतीक माना जा रहा है. विजय दिवस के अवसर पर दिल्ली में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के आवास पर एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. इस दौरान एक ड्रोन को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर प्रदर्शित किया गया, जिसे देखने के लिए प्रदर्शनी स्थल पर रखा गया था.
भारत में हर वर्ष 16 दिसंबर को मनाया जाता है विजय दिवस
इस आयोजन में ड्रोन के साथ-साथ भारतीय सेना से जुड़ी कई अन्य ऐतिहासिक और यादगार वस्तुएं भी प्रदर्शित की गईं. यह प्रदर्शनी न केवल 1971 के युद्ध की याद दिलाने वाली थी, बल्कि भारतीय सेना की वीरता और परंपराओं को सम्मान देने का माध्यम भी बनी. भारत में विजय दिवस हर वर्ष 16 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देने का प्रतीक है. इसी युद्ध के परिणामस्वरूप बांग्लादेश का जन्म हुआ था.
इन ड्रोन हमलों को घातक बताया गया था
सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जारी वीडियो में आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी के निवास पर पुनर्निर्मित YIHA ड्रोन को प्रदर्शित किया गया. यह ड्रोन हाल के सैन्य घटनाक्रमों के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है. गौरतलब है कि मई महीने में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए कई YIHA एकबारगी उपयोग (कामीकाज़े) ड्रोन तैनात किए थे. इन ड्रोन हमलों को घातक बताया गया था और इन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों में इस्तेमाल किया गया. कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया पुनर्निर्मित YIHA ड्रोन इन्हीं हमलों के बाद बरामद अवशेषों के आधार पर तैयार किया गया है, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने तकनीकी विश्लेषण और सबूत के तौर पर पेश किया.
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