हैदराबाद एनकाउंटर को जनता भले इंसाफ कहे, लेकिन पुलिस ने ऐसा कभी नहीं कहा: उज्जवल निकम

ZEE न्यूज से खास बातचीत में वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम (Ujjwal Nikam) ने कहा कि लोग भले ही इसे इंसाफ मान रहे हैं, लेकिन पुलिस इसे ऐसा नहीं मानती है. तेलंगाना पुलिस ने एक बार भी दावा नहीं किया है कि उन्होंने आरोपियों का एनकाउंटर करके कोई इंसाफ जैसा काम किया है. 

हैदराबाद एनकाउंटर को जनता भले इंसाफ कहे, लेकिन पुलिस ने ऐसा कभी नहीं कहा: उज्जवल निकम
हैदराबाद गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर पर वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम ने सवाल उठाए हैं.

नई दिल्ली: हैदराबाद गैंगरेप और हत्‍या मामले के आरोपियों की पुलिस एनकाउंटर में मौत मामले को इंसाफ बताकर भले ही देशभर में जश्न मनाया जा रहा है, लेकिन जाने-माने वकील उज्जवल निकम (Ujjwal Nikam) की राय इससे अलग है. ZEE न्यूज से खास बातचीत में वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम (Ujjwal Nikam) ने कहा कि लोग भले ही इसे इंसाफ मान रहे हैं, लेकिन पुलिस इसे ऐसा नहीं मानती है. तेलंगाना पुलिस ने एक बार भी दावा नहीं किया है कि उन्होंने आरोपियों का एनकाउंटर करके कोई इंसाफ जैसा काम किया है. पुलिस लगातार कह रही है कि आरोपियों ने उनपर हमला किया और उनके हथियार छिनकर भागने की कोशिश कर रहा था, जिसके चलते उन्हें आत्मरक्षा में गोलियां चलानी पड़ी.

उज्जवल निकम (Ujjwal Nikam) ने कहा कि अगर पुलिस ने इंसाफ मानकर एनकाउंटर किया है तो यह सरासर गलत है. उन्होंने कहा कि इससे हम अपने कानून को खुद कमजोर करेंगे. जनभावना में भले ही इसे इंसाफ कहा जाए, लेकिन इससे गलत परंपरा की शुरुआत हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा, 'देश में कानून का शासन होना ही चाहिए. आरोपियों के मुठभेड़ में मारे जाने की तुरंत जांच होनी चाहिए.' हैदराबाद से करीब 50 किलोमीटर दूर शादनगर के पास चटनपल्ली में पुलिस से कथित तौर पर हथियार छीनने की कोशिश के बाद भाग रहे आरोपियों को शुक्रवार सुबह पुलिस ने मार गिराया. पुलिस वहां दुष्कर्म की रात मौका-ए-वारदात का क्राइम सीन समझने के लिए आरोपियों को लेकर गई थी.

सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय वितरण प्रणाली और नागरिकों के मानवाधिकार के बीच संतुलन होना चाहिए. उन्होंने कहा, 'अधिकारियों को तुरंत इस मुठभेड़ की जांच शुरू करनी चाहिए और इस जांच को जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए.'

मुठभेड़ में मारे गए चारों आरोपियों की पहचान लॉरी चालक मोहम्मद आरिफ (26) और चिंताकुंटा चेन्नाकेशावुलू (20) और लॉरी क्लीनर जोलू शिवा (20) और जोलू नवीन (20) के रूप में की गई है. सभी आरोपी तेलंगाना के नारायणपेट जिले के रहने वाले थे. वरिष्ठ वकील पुनीत मित्तल ने कहा कि रहस्यमय मुठभेड़ के पीछे की असली तस्वीर सामने लाने के लिए मामले की तुरंत कानूनी जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'इस मुठभेड़ के पीछे के कारणों की जांच होनी चाहिए. आरोपियों के परिवार भी मामले की जांच के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं.'

वरिष्ठ वकील संजय पारेख ने कहा कि कानून के मुताबिक मुठभेड़ की जांच हत्या के रूप में की जानी चाहिए. उन्होंने कहा, 'कानून के अनुसार, कथित मुठभेड़ में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया जाना चाहिए और उसकी जांच की जानी चाहिए.'

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