अयोध्‍या पर SC का निर्णय पूर्ण न्‍याय नहीं, आर्टिकल 142 का सहारा लिया गया: ओवैसी

आईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने अयोध्‍या केस में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं.

अयोध्‍या पर SC का निर्णय पूर्ण न्‍याय नहीं, आर्टिकल 142 का सहारा लिया गया: ओवैसी

नई दिल्‍ली: एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने अयोध्‍या केस (Ayodhya Case) में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं. उन्‍होंने ट्वीट कर कहा कि बाबरी मस्जिद टायटल सूट में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय किसी भी तरह 'पूर्ण न्‍याय' नहीं है. इसके लिए संविधान के आर्टिकल 142 का सहारा लिया गया. गौरतलब है कि आर्टिकल 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को विशेष अधिकार मिले हैं. ओवैसी ने कहा कि यदि इसको बेहतर तरीके से कहा जाए तो ये 'अपूर्ण न्‍याय' है और यदि इसको सबसे खराब तरीके से कहा जाए तो 'पूर्णतया अन्‍याय' हुआ.  

उल्‍लेखनीय है कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अयोध्‍या केस के फैसले के बाद पहली प्रतिक्रिया में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च है, लेकिन अचूक नहीं है. उन्होंने अयोध्या भूमि विवाद मामले में फैसले को तथ्यों के ऊपर आस्था की एक जीत बताया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने आशंका व्यक्त की थी कि संघ परिवार कई अन्य मस्जिदों के मामलों में इस फैसले का उपयोग कर सकता है, जिस पर उनके दावे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी सूची में मथुरा, काशी और लखनऊ की मस्जिदें शामिल हैं.

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हैदराबाद के सांसद ने आगाह किया कि देश एक हिंदू राष्ट्र की राह पर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, "संघ परिवार और भाजपा कह रहे हैं कि हिंदू राष्ट्र के लिए सड़क अयोध्या से शुरू होती है. वे अब एनआरसी, नागरिकता संशोधन विधेयक लाना चाहते हैं. वास्तव में मोदी 2.0 सरकार भारत को हिंदू राष्ट्र बना देगी."

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने नौ नवंबर को अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि का स्वामित्व हिंदुओं को दे दिया, जिसके बाद वहां राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है. अदालत ने फैसला सुनाया कि मुसलमानों को वैकल्पिक स्थल पर पांच एकड़ जमीन मिलेगी. ओवैसी ने संवाददाताओं से कहा था कि जिन लोगों ने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किया, उन्हें राम मंदिर बनाने के लिए जमीन सौंपी गई है. उन्होंने कहा, "अगर बाबरी मस्जिद को छह दिसंबर, 1992 को ध्वस्त नहीं किया जाता, तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या होता."