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प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों के लिए अलग-अलग मानक नहीं हो सकते: दिल्ली हाई कोर्ट

अदालत ने जून 2017 में नवजात को गलती से मृत घोषित करने में सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. नवजात बच्चे को वापस अस्पताल लाया गया था और उसे वेटिंलेटर पर रखा गया लेकिन उसकी 36 घंटे बाद मौत हो गई.

प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों के लिए अलग-अलग मानक नहीं हो सकते: दिल्ली हाई कोर्ट
(फाइल फोटो)

नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि जहां तक चिकित्सकीय लापरवाही के मामलों की बात है तो केंद्र और आप सरकार उनके द्वारा संचालित अस्पतालों और निजी अस्पतालों के लिए अलग अलग मानक नहीं रख सकती. न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने जून 2017 में नवजात को गलती से मृत घोषित करने में सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. नवजात बच्चे को वापस अस्पताल लाया गया था और उसे वेटिंलेटर पर रखा गया लेकिन उसकी 36 घंटे बाद मौत हो गई.

अदालत ने कहा कि इसी तरह की घटना में दिल्ली सरकार ने मैक्स अस्पताल को दो दिन के लिए बंद कर दिया था तो सफदरजंग अस्पताल के संबंधित स्टाफ या डाक्टरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई. अदालत ने कहा, ‘‘दिल्ली सरकार ने इसी तरह के मुद्दे पर मैक्स अस्पताल को दो दिन के लिए बंद कर दिया था. निजी अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों के लिए दो अलग अलग तरह के मानक नहीं हो सकते.’’ 

अदालत ने दिल्ली सरकार से मैक्स अस्पताल की उस घटना के संबंध में उसके सामने फाइल रखने को कहा जहां 30 नवंबर 2017 को समय पूर्व जन्मे जुड़वां में से एक बच्चे को गलती से मृत घोषित कर दिया था और बाद में वह जीवित मिला था. इस बच्चे की एक सप्ताह बाद मौत हो गई थी.

अदालत ने सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को भी निर्देश जारी करके एक सप्ताह के अंदर मां और बच्चे के सभी मेडिकल रिकार्ड परिवार को वापस करने को कहा. अदालत ने इससे पहले अस्पताल के खिलाफ चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप की जांच के लिए एक समिति गठित करने का आदेश दिया था.