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आज जो सत्ता में हैं वे कभी पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चिल्लाते थे : फारूक अब्दुल्ला

सोमवार को भारत बंद के दौरान देशभर में जगह-जगह धरने-प्रदर्शन किए गए. कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने तेल की बढ़ती कीमतों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया.

आज जो सत्ता में हैं वे कभी पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चिल्लाते थे : फारूक अब्दुल्ला
फारूक अब्दुल्ला ने तेल की बढ़ती कीमत और रुपये के गिरते स्तर के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है

नई दिल्ली : तेल की कीमतों को लेकर देश की राजनीति में घमासान मचा हुआ है. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ सोमवार को कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने भारत बंद का आयोजन किया. इस बंद के दौरान कई स्थानों पर छुटपुट आगजनी और हिंसा भी हुई. कांग्रेस ने तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला. नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख तथा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि तेल की कीमतों को लेकर भारत बंद का आयोजन पहली बार नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि आज जो लोग सत्ता में हैं, वे भी कभी ईंधन के दामों को लेकर चिल्लाते थे. 

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपया तेजी से गिर रहा है. उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की जो कीमतों में जो उछाल आया है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. देश इस समय बड़ी परेशानी से गुजर रहा है. 

नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुखिया ने कहा कि 2012 में जब तेज की कीमतें बढ़ी थीं तब जो लोग आज सत्ता में हैं, वे चीख-चीख कर तत्कालीन सरकार को दोषी ठहरा रहे थे और आज वही लोग तेल की कीमतों के पीछे विदेशी कारण बता रहे हैं. 

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पटना में भारत बंद के दौरान समाजवादी पार्टी ने बैलगाड़ी में बैठकर तेल की बढ़ती कीमतों का विरोध किया (फोटो-IANS)

पेट्रोल-डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर
उधर, पेट्रोल और डीजल की कीमत में तेजी सोमवार को भी बनी रही और रुपये की विनिमय दर में गिरावट के कारण आयात महंगा होने से यह नई ऊंचाई पर पहुंच गई. 

सार्वजनिक क्षेत्र की खुदरा ईंधन कंपनियों द्वारा अधिसूचना नयी दरों के अनुसार पेट्रोल का भाव सोमवार को 23 पैसे लीटर और डीजल 22 पैसे लीटर बढ़ गया. इससे दिल्ली में पेट्रोल 80.73 रुपये लीटर की रिकार्ड ऊंचाई पर, जबकि डीजल 72.83 रुपये प्रति लीटर के भाव पर पहुंच गया.

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दिल्ली में कर की दरें कम होने से ईंधन की कीमत सभी महानगरों तथा राज्यों की राजधानी में सबसे कम है. सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कारोबार के दौरान करीब 94 पैसा टूटकर 72.67 रुपये के न्यूनतम स्तर पर चला गया.

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मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भारत बंद के दौरान कुछ इस तरह अपना आक्रोश व्यक्त किया (फोटो-PTI)

अगस्त के मध्य से पेट्रोल की कीमत 3.65 रुपये लीटर जबकि डीजल 4.06 रुपये लीटर महंगा हुआ है. इसका प्रमुख कारण अमेरिकी डालर के मुकाबले रुपये के रिकार्ड न्यूनतम स्तर पर पहुंचना है. खुदरा ईंधन की कीमत में करीब आधा हिस्सा केंद्रीय तथा राज्यों के कर का है. 

कीमत से आधी है तेल की लागत
तेल कंपनियों के अनुसार रिफाइनरी में पेट्रोल की लागत करीब 40.50 रुपये लीटर है जबकि डीजल 43 रुपये लीटर बैठता है. केंद्र फिलहाल पेट्रोल पर 19.48 रुपये लीटर जबकि डीजल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क वसूलती है. इसके ऊपर राज्य सरकारें मूल्य वद्धिर्त कर (वैट) लगाती हैं. सबसे कम वैट अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में है. वहां दोनों ईंधन पर छह प्रतिशत कर वसूला जाता है. वहीं मुंबई में पेट्रोल पर वैट सर्वाधिक 39.12 प्रतिशत जबकि तेलंगाना में डीजल पर सर्वाधिक 26 प्रतिशत वैट है. दिल्ली में पेट्रोल और डीजल पर वैट क्रमश: 27 प्रतिशत और 17.24 प्रतिशत है.

बंद से करोड़ों का कारोबार प्रभावित
पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों के विरोध में कांग्रेस के आह्वान पर सोमवार को भोपाल की प्रमुख मंडियों और बाजारों में आधे दिन कारोबार ठप रहा. इससे करोड़ों रुपये के कारोबार पर असर पड़ा. बंद के दौरान किराना जिंसों, अनाजों, दाल-दलहनों, जेवरात, बर्तनों, लोहा उत्पादों, कपड़ों आदि सामान के प्रमुख कारोबारी केंद्र नहीं खुले. शहर के सामान्य जन-जीवन पर भी बंद का असर नजर आया. कई शैक्षणिक संस्थान सोमवार को नहीं खुले. पेट्रोल पम्प भी सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक बंद रहे.