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'अगर मुझे ठगा जा सकता है तो...', ममता के सांसद हुए ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार, 56 लाख का चूना लगा तो उठाया बड़ा सवाल

ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के एक कथित मामले में कल्याण बनर्जी 56 लाख से अधिक की ठगी का शिकार हो गए हैं. इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी नेता ने कहा कि अगर मेरे जैसा कोई व्यक्ति बैंक धोखाधड़ी के जाल में फंस गया, तो आम लोगों को क्या झेलना पड़ेगा?

ममता के सांसद हुए ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार
ममता के सांसद हुए ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार

देशभर में साइबर क्राइम का मामला थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. आम नागरिक तो इस धोखाधड़ी के जाल में फंस ही रहे हैं, अब नेता भी इसका शिकार हो गए हैं. तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी ने शनिवार को साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि अगर उनके जैसे जनप्रतिनिधि भी इस तरह के घोटालों का शिकार हो सकते हैं तो आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे की जा सकती है.

ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के एक कथित मामले में कल्याण बनर्जी 56 लाख से अधिक की ठगी का शिकार हो गए हैं. इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी नेता ने कहा कि अगर मेरे जैसा कोई व्यक्ति बैंक धोखाधड़ी के जाल में फंस गया, तो आम लोगों को क्या झेलना पड़ेगा? वित्त मंत्रालय साइबर धोखाधड़ी निरोधक इकाई क्यों नहीं बना रहा है?"

TMC सांसद हुए ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार 

पश्चिम बंगाल के सेरामपुर से सांसद ने बताया कि उनका भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में एक खाता है जिसका उन्होंने लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किया है. कल्याण बनर्जी ने कहा, "किसी ने केवाईसी (KYC) का इस्तेमाल करके घोटाला किया है. मेरी तस्वीर लगाई गई है. पैन और आधार का गलत इस्तेमाल किया गया है. उस खाते का इस्तेमाल करके मेरे खाते से लगभग 57 लाख रुपये निकाल लिए गए हैं, जो मैंने सांसद रहते हुए जीते थे."

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ममता सरकार के सांसद ने एक इंटरव्यू में आगे कहा कि एसबीआई (SBI) द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद, मामले की जांच शुरू हो गई है. शुक्रवार रात को, एसबीआई ने मेरे संसद खाते में 57 लाख रुपये जमा कर दिए. उन्होंने कहा कि यह किसी आंतरिक गड़बड़ी के कारण हुआ.

क्या है पूरा मामला?

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, साइबर अपराधियों ने एसबीआई की विधान सभा उप-शाखा में बनर्जी के पुराने खातों में से एक को निशाना बनाया और फिर अनधिकृत लेनदेन कर बड़ी रकम साफ कर ली. कथित तौर पर यह खाता 2001 और 2006 के बीच खोला गया था, जब बनर्जी आसनसोल दक्षिण से विधायक थे। जांचकर्ताओं ने बताया कि इस धोखाधड़ी के लिए जाली पैन और आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया था. बता दें कि कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं.

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