Stalin Vs Governor: राजभवन से जारी किए गए बयान में आगे स्पष्ट किया गया कि 13% विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित किया गया था, जिनमें से इन रेफरल्स का एक बड़ा हिस्सा राज्य सरकार की अपनी सिफारिश पर किया गया था.
Trending Photos
)
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि और सूबे के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बीच विधेयकों की मंजूरी को लेकर चल रहा कथित टकराव लगातार तेज होता जा रहा है. इस टकराव को लेकर राजभवन ने एक कड़े लहजे में खंडन जारी किया है. राजभवन ने इस विवाद को लेकर बयान जारी करते हुए कहा, 'तमिलनाडु के राज्यपाल के खिलाफ सार्वजनिक क्षेत्र में कुछ निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत आरोप लगाए गए हैं.' राज्यपाल के कार्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विधानसभा द्वारा पारित 81% विधेयकों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से अधिकांश को तीन महीने के भीतर मंजूरी भी मिल गई है.
राजभवन से जारी किए गए बयान में आगे स्पष्ट किया गया कि 13% विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित किया गया था, जिनमें से इन रेफरल्स का एक बड़ा हिस्सा राज्य सरकार की अपनी सिफारिश पर किया गया था. यह डेटा इसलिए दिया गया है ताकि लोगों को इस बात की जानकारी हो सके कि राज्यपाल जानबूझ कर विधायी कार्यों को बाधित नहीं कर रहे हैं. इसके अलावा राज्य में होने वाली चर्चा में राज्यपाल के मुख्यमंत्री के बीच अनबन और कार्यों में बाधा जैसे आरोपों को भ्रामक और निराधार बताया गया है.
81 प्रतिशत बिलों को मिली मंजूरी
राजभवन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि राज्यपाल ने 31 अक्टूबर, 2025 तक मिले कुल 211 विधेयकों में से 81 फीसदी विधेयकों को मंजूरी दे दी है. इन 211 विधेयकों में से शुरुआती 10 विधेयकों को उन्होंने रोक लिया था और उनके निर्णयों के बारे में सरकार को जानकारी दी थी. इसके बावजूद तमिलनाडु राज्य विधानसभा ने उन्हें एक बार फिर से पारित करवाने के लिए राज्यपाल को सौंप दिया था. 18 सितंबर 2021 से लेकर अक्टूबर 2025 तक मिले कुल 211 विधेयकों का विवरण कुछ इस प्रकार है. इसमें से 170 विधेयकों को मंजूरी दे दी गई थी, 27 विधेयकों को राष्ट्रपति के पास विचार करने के लिए रखा गया था. इसमें 27 में से 16 विधेयकों पर राष्ट्रपति के विचारार्थ रखे गए जबकि 4 विधेयक एक मैसेज के साथ वापस किया गया था जबकि 2 विधेयक सरकार ने खुद वापस ले लिए थे.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को दी थी नसीहत
इस मामले में जब तमिलनाडु की स्टालिन सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी तब सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा, 'राज्यपाल को एक दोस्त, दार्शनिक और राह दिखाने वाले की तरह होना चाहिए. आप संविधान की शपथ लेते हैं. आपको किसी राजनीतिक दल की तरफ से संचालित नहीं होना चाहिए. आपको उत्प्रेरक बनना चाहिए, अवरोधक नहीं. राज्यपाल को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कोई बाधा पैदा न हो. राज्यपाल के पास कोई वीटो पॉवर नहीं है.'
यह भी पढ़ेंः 1800 करोड़ की जमीन 300 करोड़ में! क्या है अजित पवार के सिर चढ़ने वाला बड़ा घोटाला