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कावेरी जल विवाद से परेशान था वाइको का संबंधी की आत्मदाह की कोशिश

आधिकारीक बयान के मुताबिक, एमडीएमके नेता ने लोगों से खुद को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से दूर रहने को कहा है.

कावेरी जल विवाद से परेशान था वाइको का संबंधी की आत्मदाह की कोशिश
प्रतीकात्मक फोटो

चेन्नई : तमिलनाडु में कावेरी नदी के जल को छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. एमडीएमके के संस्थापक वाइको ने शुक्रवार(13 अप्रैल) को कहा कि उनके एक निकट संबंधी ने कावेरी जल विवाद से व्यथित होकर विरुधुनगर में आत्मदाह का प्रयास किया. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. आधिकारीक बयान के मुताबिक, एमडीएमके नेता ने लोगों से खुद को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से दूर रहने को कहा है.

घर से बहाने से निकला था श्रवण
वाइको ने कहा कि श्रवण सुरेश (पीड़ित) गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेन्नई दौरे के विरोध में दिए गए उनके भाषण को सुनने के बाद व्यथित हो गया. श्रवण सुरेश, वाइको की पत्नी का संबंधी है. वाइको के मुताबिक, सुरेश ने शुक्रवार सुबह कहा कि वह सैर के लिए जा रहा है लेकिन हमें बाद में पता चला कि उसने कावेरी मुद्दे से व्यथित होने के कारण खुद पर केरोसिन छिड़क लिया और आग लगा दी.

सीडब्ल्यूआरसी के गठन के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं राजनेता
वाइको ने कहा, "मैंने उसके जीवित बचने की उम्मीद खो दी थी. मेरे परिवार में सभी इस घटना से दुखी हैं." उन्होंने कहा कि सुरेश को मदुरई के अपोलो अस्पताल ले जाया गया है. तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टियां और विभिन्न संगठन कावेरी प्रबंधन बोर्ड (सीएमबी) और कावेरी जल नियामक समिति (सीडब्ल्यूआरसी) का गठन नहीं किए जाने को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. 

केंद्र सरकार को करना था सीएमबी का गठन
सर्वोच्च न्यायालय ने 16 फरवरी को तमिलनाडु को होने वाली कावेरी नदी के जल की आपूर्ति 192 टीएमसी से घटाकर 177.25 टीएमसी कर दी थी. वहीं, कर्नाटक की जल हिस्सेदारी बढ़ाकर 14.75 टीएमसी कर दी थी. अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश के छह सप्ताह के भीतर से सीएमबी का गठन करने का आदेश दिया था. लेकिन सरकार इस समय सीमा में बोर्ड का गठन करने में असफल रही. यह समय सीमा 29 मार्च को समाप्त हो गई थी.

पुराना है मामला
आपको बता दे कि तीनों राज्यों ने कावेरी जल विवाद अधिकरण (सीडब्ल्यूडीटी) के फैसले के खिलाफ कर्नाटक, तमिलनाडु, और केरल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट ने 20 सितंबर 2017 को फैसला सुरक्षित रख लिया था. खंडपीठ ने इस पूरे मामले में टिप्पणी की थी कि पिछले दो दशकों में काफा भम्र की स्थिति रही है.

जल विवाद पर बनेगा कानून
केंद्र सरकार ने विभिन्न राज्यों के बीच बढ़ते जल विवादों को देखते हुए अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) विधेयक को संसद में फिर पेश करेगी. इसमें अधिकरणों के अध्यक्षों, उपअध्यक्षों की आयु और निर्णय देने की समय सीमा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं. विधेयक को जल्द ही कैबिनेट में मंजूरीके लिए पेश किया जाएगा.