जानिए, ट्रिपल तलाक पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस ने क्या कहा?

एक तरफ, जहां कांग्रेस ने इस फैसले का स्वागत किया है. वहीं दूसरी और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल इस फैसले के पक्ष में नहीं थे.

जानिए,  ट्रिपल तलाक पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस ने क्या कहा?
तीन तलाक के फैसले पर कांग्रेस ने दिया ऐसा रिएक्शन

नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए तीन तलाक को 'असंवैधानिक' और 'मनमाना' करार देते हुए कहा कि यह 'इस्लाम का हिस्सा नहीं' है. पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने दो के मुकाबले तीन मतों से दिए अपने फैसले में कहा कि तीन तलाक को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त नहीं है.न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने कहा कि तीन तलाक इस्लाम का मौलिक रूप से हिस्सा नहीं है, यह कानूनी रूप से प्रतिबंधित और इसे शरियत से भी मंजूरी नहीं है.

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वहीं, प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर ने कहा कि तीन तलाक इस्लामिक रीति-रिवाजों का अभिन्न हिस्सा है और इसे संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है. न्यायमूर्ति खेहर ने अपने फैसले में संसद से इस मामले में कानून बनाने की अपील की. उन्होंने अगले छह माह के लिए तीन तलाक पर रोक लगा दी. साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों से अपील की कि वे अपने मतभेदों को भूलकर इससे संबंधित कानून बनाएं.

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तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हर राजनीतिक दल के लोग अपनी राय रख रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस पार्टी ने भी इस फैसले पर अपने विचार सामने रखे हैं. फैसले पर कांग्रेस ने कहा कि, हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं. यह एक प्रगतिशील, धर्मनिरपेक्ष फैसला है. फैसले से मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार मिलेगा. 

कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस फैसले का स्वागत किया है.

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह फैसला सच्चाई, वास्तविकता और सही इस्लाम को उजागर करता है.

कपिल सिब्बल नहीं थे तीन तलाक खत्म करने के पक्ष में 

एक तरफ, जहां कांग्रेस ने इस फैसले का स्वागत किया है. वहीं दूसरी और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल इस फैसले के पक्ष में नहीं थे. तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान  AIMPLB के वकील कपिल सिब्बल ने तीन तलाक की तुलना राम के अयोध्या में जन्म से कर डाली थी. कपिल ने कहा था कि तीन तलाक आस्था से जुड़ा विषय है, ठीक उसी तरह जैसे कि मान लीजिए अगर मेरी आस्था राम में है तो मेरा मानना है कि राम अयोध्या में पैदा हुए. ये आस्था से जुड़ा मामला है. उस पर सवाल नहीं तो तीन तलाक पर क्यों. इसलिए इस मामले में कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए.

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कपिल सिब्बल ने सुनवाई के दौरान कहा था कि, तीन तलाक 1400 साल पुरानी प्रथा है और यह स्वीकार की गई है. यह मामला आस्था से जुड़ा है, जो 1400 साल से चल रहा है तो ये गैर-इस्लामिक कैसे है.

यही नहीं, तीन तलाक की तुलना कपिल सिब्बल ने हिन्दुओं से की थी. उन्होंने कहा कि संविधान सभी धर्मों के पर्सनल लॉ को पहचान देता है. हिंदुओं में दहेज के खिलाफ दहेज उन्मूलन एक्ट लेकर आए, लेकिन प्रथा के तौर पर दहेज लिया जा सकता है.  इस तरह हिंदुओं में इस प्रथा को सरंक्षण दिया गया है तो वहीं मुस्लिम के मामले में इसे अंसवैधानिक करार दिया जा रहा है. कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए नहीं तो सवाल उठेगा कि इस मामले को क्यों सुना जा रहा है? क्यों संज्ञान लिया गया.

22 अगस्त को आया ऐतिहासिक फैसला 

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक बार में तीन तलाक पर अगले छह महीने तक के लिए रोक लगा दी है. कोर्ट में कहा गया कि संसद जब तक इस पर कानून नहीं लाती तब तक ट्रिपल तलाक पर रोक रहेगी. कोर्ट ने केंद्र सरकार को संसद में इसे लेकर कानून बनाने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर छह महीने में कानून नहीं बनाया जाता है तो तीन तलाक पर शीर्ष अदालत का आदेश जारी रहेगा. कोर्ट ने इस्लामिक देशों में तीन तलाक खत्म किए जाने का हवाला दिया और पूछा कि स्वतंत्र भारत इससे निजात क्यों नहीं पा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई कि केंद्र जो कानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून संबंधी चिंताओं का खयाल रखा जाएगा. कोर्ट ने राजनीतिक दलों से अपने मतभेदों को दरकिनार रखने और तीन तलाक के संबंध में कानून बनाने में केंद्र की मदद करने को कहा. 

चीफ जस्टिस खेहर ने कहा, 'तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित नहीं कर सकते.' उन्होंने ने कहा कि तलाक-ए-बिद्दत आर्टिकल 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन नहीं करता.