हैदराबाद के निजाम परिवार की बहु रह चुकी नीलोफर की खूबसूरती के चर्चे ना सिर्फ भारत में थे बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में होते थे. आज हम आपके उनकी जिंदगी के कुछ अहम पहलुओं के बारे में बताने जा रहे हैं.
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Niloufer Hyderabad: हैदराबाद के शाही महलों को लेकर कहा जाता है कि एक वक्त ऐसा था जब यहां की एक राजकुमारी की खूबसूरती ना सिर्फ देखी जाती थी बल्कि, बहुत महसूस की जाती रही है. वह राजकुमारी थीं नीलोफर, भारत की निजामियात में आई वह तुर्की परी, जिसने हैदराबाद को रॉयल्टी का एक नया चेहरा दिया और अपने नाम के साथ फैशन, शालीनता और रहस्य की ऐसी तहें जोड़ दीं जिन्हें आज भी इतिहास खोलकर देखता है. उनकी कहानी भारत से शुरू नहीं होती. यह चमक तो दरअसल बहुत दूर उस इस्तांबुल में जन्मी थी, जहां ओटोमन साम्राज्य का सूरज ढल रहा था और उसी ढलती रौशनी के बीच एक नवजात राजकुमारी की आंखों में दुनिया ने एक नई सुबह का वादा देखा था. वह सुबह, जिसे बाद में हैदराबाद ने अपना चांद बनाकर दुनिया को दिखाया.
जिस समय ऑटोमन साम्राज्य बिखर रहा था, तभी हैदराबाद के तब के शासक मीर उस्मान अली खान (निजाम) अपने बेटे लिए शाही और ऊंचे घराने की दुल्हन की तलाश कर रहे थे. ऐसे में उनकी नजर नजर ओटोमन साम्राज्य के इस चिराग पर पड़ी और अपने बेटे से नीलोफर का विवाह करवा दिया. दोनों की शादी 1931 में फ्रांस के एक विला में इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ हुई थी.
इस सबके बावजूद इस राजकुमारी का एक पहलू तनहाई भी रहा है. मां की बनने की चाहत, पति की बेरुखी और टूटते रिश्तों के बीच वे अपने आप में खुद एक ऐसी कहानी बन गईं जिसने चमकदार ताज तो पहना हुआ था लेकिन उस ताज में कई ऐसे कांटे थे जो राजुकमारी को अंदर से चुभ रहे थे. वैसे तो उनकी खूबसूरती के अनगिनत किस्से रहे हैं और वो किस्से ना सिर्फ हैदराबाद तक सीमित रहे बल्कि उन्होंने यूरोप को भी अपने फैशन से प्रभावित किया. यूरोपीय पत्रिकाओं ने उन्हें 'हैदराबाद की कोह-ए-नूर' भी कहा है. उन्होंने भारतीय साड़ी को फ्रांसीसी एलिंगेस के मिश्रण के में बदलकर एक दिलचस्प ट्रेंड बनाया था. अपनी फैशन सेंस के चलते वो ग्लोबन फैशन आइकॉन बन गईं थी.
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दोनों की शादी ज्यादा दिनों तक नहीं चली और इसकी मुख्य वजह संतान ना होना थी. राजकुमारी नीलोफर और उनके पति मोअज्जम बच्चे ना होने के चलते काफी परेशान रहे. जबकि दूसरी तरफ शाही परिवार और उस जमाने की सामाजिक अपेक्षाओं में बच्चा होना बहुत जरूरी माना जात था. जैसे-जैसे वक्त आगे बढ़ा तो संतान ना होने का खालीपन और रिश्ते को खोखला करता चलता गया. सामाजिक, पारिवारिक दबाव के चलते राजकुमारी के पति मुअज्जम ने 1948 में रजिया बेगम से दूसरी शादी कर ली.
हालांकि इन सब चीजों को बर्दाश्त करते हुए राजकुमारी ने अनगिनत सामाजिक काम भी किए. वो भी एक ऐसा दौर में जब मुस्लिम शाही महिलाओं के लिए जनाना से बाहर निकलना बहुत मुश्किल हुआ करता था. शादी टूटने के बाद नीलोफर पेरिस लौट गईं थी और उन्होंने यहीं पर उन्होंने अपनी जिंदगी के अगले चैप्टर का आगाज करते हुए 1963 में एक अमेरिकी व्यक्ति, Edward Julius Pope Jr. से शादी कर ली थी. नीलोफर की कहानी किसी एक देश की कहानी नहीं रही, उन्होंने तीन संस्कृतियों को अपने किरदार में पिरोया, हर पड़ाव ने उन्हें नया नाम, नई पहचान और नया संघर्ष दिया.