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तमिलनाडु: 2000 सांडों के साथ हो रहा था जलीकट्टू, हमले में गई 2 लोगों की जान

रविवार को  पुडुकोट्टई के इल्लुपर में जल्लीकट्टू खेल का आयोजन किया गया था. इसी दौरान एक 32 वर्षीय रामू पर एक सांड ने हमला कर दिया.

तमिलनाडु: 2000 सांडों के साथ हो रहा था जलीकट्टू, हमले में गई 2 लोगों की जान
फोटो साभारः ANI

नई दिल्ली : तमिलनाडु में सांडों को काबू करने वाले खेल जल्लीकट्टू के दौरान रविवार को दो लोगों की मौत हो गई. रविवार को  पुडुकोट्टई के इल्लुपर में जल्लीकट्टू खेल का आयोजन किया गया था. इसी दौरान एक 32 वर्षीय रामू पर एक सांड ने हमला कर दिया. आनन-फानन में रामू को अस्पताल ले जाने के लिए उठाया गया, रामू को जब तक अस्पताल पहुंचाने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया. इल्लुपर के अलावा त्रिची के जयीपुरम में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया. यहां पर 35 वर्षीय सतीश नाम के युवक की मौत हो गई. 

जल्लीकट्टू ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
पुडुकोट्टई में रविवार को आयोजित जल्लीकट्टू में सबसे ज्यादा संख्या में सांडों को मैदान में उतारने से इसका नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है. तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री सी विजयभास्कर के समन्वय से वीरालिमलाई में सांडों को काबू करने वाले इस खेल में 1,354 सांडों को शामिल किया गया. 424 लोग इन सांडों पर काबू पाने का प्रयास कर रहे थे.

जल्लीकट्टू पर विवाद कब शुरू हुआ?

एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने जल्लीकट्टू को पशुओं पर क्रूरता बताया था. बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में इस पर बैन लगाने के लिए केस फाइल किया था.

27 नवंबर 2010: SC ने शर्तों के साथ तमिलनाडु में जल्लीकट्टू मनाने के निर्देश दिए.

2011: मिनिस्ट्री ऑफ एन्वॉयरमेंट एंड फॉरेस्ट ने नोटिफिकेशन जारी किया कि इवेंट में बैल शामिल नहीं होंगे और इवेंट पर बैन लग गया. लेकिन, 2009 ने तमिलनाडु रेगुलेशन ऑफ जल्लीकट्टू एक्ट नं. 27 के तहत ये इवेंट जारी रही.

7 मई 2014:SC ने तमिलनाडु सरकार के एक्ट को दरकिनार कर जल्लीकट्टू पर बैन लगा दिया.

8 जनवरी 2016: मिनिस्ट्री ऑफ एन्वॉयरमेंट एंड फॉरेस्ट ने कुछ शर्तों के साथ जल्लीकट्टू को मंजूरी दी.

14 जनवरी 2016: SC ने एनीमल वेलफेयर बोर्ड और PETA की पिटीशन पर जल्लीकट्टू पर बैन को जारी रखा. केंद्र के ऑर्डर पर स्टे लगा दिया.

8 जनवरी 2017: चेन्नई के मरीना बीच पर सैकड़ों लोगों ने जल्लीकट्टू पर बैन के विरोध में प्रदर्शन किया. ये विरोध पूरे तमिलनाडु में फैल गया.

12 जनवरी 2017: SC ने राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर बैन को बरकरार रखा. लेकिन, तमिलनाडु में कई जगह जल्लीकट्टू हुआ. केंद्र की रिक्वेस्ट पर SC ने जल्लीकट्टू पर अपना फैसला कुछ दिनों के लिए टाल दिया.

23 जनवरी 2017: तमिलनाडु के गवर्नर ने जल्लीकट्टू जारी रखने के लिए ऑर्डिनेंस इश्यू किया, जिस पर तमिलनाडु विधानसभा में बिल पास कर जल्लीकट्टू को प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी ऑफ एनिमल एक्ट (1960) से छूट दे दी.