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कुंभ और रामलीला जैसी धरोहर को बचाएगा संयुक्त राष्ट्र, बनाया ये प्लान

अब तक यूनेस्को की ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की प्रतिनिधि सूची’ में भारत के कुल 13 अस्पृश्य सांस्कृतिक धरोहरों को शामिल किया गया है.  

कुंभ और रामलीला जैसी धरोहर को बचाएगा संयुक्त राष्ट्र, बनाया ये प्लान
संयुक्त राष्ट्र ने अपने स्थापना दिवस पर अपने ऐतिहासिक परिसर को भारत के सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति समर्पित किया..(फाइल फोटो)

नई दिल्ली: कालांतार में भारत के अनेक अमूर्त धरोहरों के गुम हो जाने से चिंतित संयुक्त राष्ट्र शीघ्र ही देश की विभिन्न कलाओं, शिल्पकलाओं और अन्य अमूर्त विरासतों की एक ‘फेहरिस्त’ तैयार करने की योजना शुरु करेगा. भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर युरी अफानासीव ने कहा कि ‘विकी शैली की परियोजना’ तैयार की गई है जिसमें विभिन्न पक्षों को शामिल कर ‘क्राउड सोर्सिंग’ से इसे पूरा किया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘‘भारत में न केवल ऐतिहासिक स्मारक और ऐतिहासिक स्थल तथा निर्मित धरोहर हैं बल्कि यहां लोक संगीत, कलाएं, कपड़ा डिजायन, हस्तकला जैसी अनगिनत अमूर्त सांस्कृतिक विरासत हैं.’’

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उन्होंने कहा कि अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों रोजाना गायब हो रहे हैं और इससे ‘मुझे बड़ा दुख’ होता है. अफानासीव ने कहा, ‘‘हम भारत में एक परियोजना पर काम कर रहे हैं जिसमें अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों की फेहरिस्त तैयार की जाएगी. हम जानकारियां जुटाने के लिए लोगों की मदद लेंगे. ’’

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संयुक्त राष्ट्र ने 24 अक्टूबर को अपने स्थापना दिवस पर यहां अपने ऐतिहासिक परिसर को भारत के सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति समर्पित किया. इस मौके पर देश के मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर प्रदर्शित किए गए. अब तक यूनेस्को की ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की प्रतिनिधि सूची’ में भारत के कुल 13 अस्पृश्य सांस्कृतिक धरोहरों को शामिल किया गया है.

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उनमें कुंभ मेला, नवरोज, वैदिक मंत्रोच्चार, रामलीला, कुटियाट्टम, संस्कृत नाटक, रम्माण (गढ़वाल का धार्मिक त्यौहार), कालबेलिया (राजस्थान का लोकगायन और नृत्य) और छऊ नृत्य आदि शामिल हैं. अफानासीव ने कहा, ‘‘किसी छोटे से शहर में कशीदाकारी कर साड़ियां बनाने की सामान्य परंपरा, देश के किसी कोने के किसी गांव में लोक संगीत, किसी की मां या दादी द्वारा तैयार रिसीपी, जो शायद गायब हो रही है क्योंकि अगली पीढ़ी अन्य या बड़े शहरों में चली गई.’’

उन्होंने कहा कि परियोजना करीब सालभर चलेगी. संयुक्त राष्ट्र स्थापना दिवस पर उन्होंने यह कहते हुए भारत की सांस्कृतिक विरासत की प्रशंसा की कि ‘‘मुझे भारत से उसके समृद्ध स्वाद,रंग, ध्वनियां, गंध और व्यंजन आदि को लेकर प्यार है.’’ 

इनपुट भाषा से भी