अखिलेश यादव का 18 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर का दौरा क्यों है खास?
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अखिलेश यादव का 18 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर का दौरा क्यों है खास?

यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) के लिए राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं. एसपी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस दौड़ में आगे निकलने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं. 

अखिलेश यादव का 18 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर का दौरा क्यों है खास?

लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) में भले ही अभी 2-3 महीने का वक्त बचा हो लेकिन राजनीतिक दलों की चुनावी तैयारियां जोरों पर है. यूपी में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) चुनाव प्रचार में पूरी तरह उतर चुकी है. 

अखिलेश के नाम पर लड़ेगी एसपी

वर्ष 2014, 2017 के चुनावों से सबक़ लेते हुए एसपी (SP) ने 2022 के चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है. पार्टी ने वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के चेहरे के इर्द गिर्द ही लड़ने की रूपरेखा तैयार की है. इसके साथ ही अखिलेश का पूरा फोकस ओबीसी (OBC) वोट बैंक पर ही है.

18 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर में होंगे अखिलेश

बुंदेलखंड में 2 दिनों तक समाजवादी विजय रथ यात्रा चलाने के बाद अखिलेश यादव अब 18 अक्टूबर को पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के दौरे पर जाएंगे. अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) मुजफ्फरनगर में कश्यप महासम्मेलन को संबोधित करेंगे. कश्यप महासम्मेलन का आयोजन समाजवादी पार्टी (SP) का OBC मोर्चा करा रहा है. दरअसल पूर्वी यूपी से लेकर पश्चिमी यूपी तक लगभग 5 फ़ीसदी निषाद-कश्यप (Nishad) वोट बैंक है. निषाद-केवट-मल्लाह-कश्यप मतदाता कई सीटों पर बहुत प्रभावशाली हैं और यूपी के हर हिस्से में इनकी आबादी है.

ओबीसी वोटों को साथ लाने की कोशिश

पश्चिमी यूपी में निषाद वोट बैंक के अलावा अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) जाट, गुर्जर, पाल, शाक्य, सैनी वोट बैंक को भी सपा के साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं. दरअसल अखिलेश यादव को यह अच्छी तरह पता है कि पश्चिम यूपी में मुस्लिम वोट के साथ साथ अगर ओबीसी वोट उनके पाले में आया, तो सपा (SP) का प्रदर्शन शानदार रह सकता है. जाट वोट बैंक को साथ लाने के लिए अखिलेश ने आरएलडी के साथ गठबंधन किया है. 

गुर्जर-निषाद वोटों पर भी हैं निगाहें

वहीं गुर्जर समाज पर डोरे डालने की भी शुरूआत अखिलेश (Akhilesh Yadav) ने सहारनपुर से कर चुके हैं. पश्चिम यूपी में कई सीटों पर कश्यप (Nishad) वोट बहुत निर्णायक भूमिका में है. यही कारण है कि अखिलेश यादव लगातार इस वोट बैंक को एसपी के पाले में लाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. इसी साल 21 जुलाई को अखिलेश यादव ने उन्नाव में निषाद समाज के बड़े नेता मनोहर लाल की प्रतिमा का उद्घाटन किया तो वहीं सपा ने फूलन देवी की जयंती भी पूरे यूपी में मनाई. 

फूलन देवी निषाद समाज से थीं और मुलायम सिंह यादव ने उन्हें सांसद बनाया था. बुंदेलखंड की अपनी रथयात्रा के दौराना काल्पी में अखिलेश यादव ने फूलन देवी की मां से मुलाक़ात कर आशीर्वाद लिया. यही नहीं फूलन देवी की बहन भी सपा में शामिल हो चुकी हैं.

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बीजेपी भी निषाद वोटों को सहेजने में जुटी

निषाद वोट बैंक का प्रभाव यूपी में इतना ज़्यादा है कि कोई भी दल इसे छोड़ना नहीं चाहता है. बीजेपी ने भी 2019 के लोकसभा चुनाव में निषाद (Nishad) पार्टी के साथ गठबंधन किया था. तब प्रवीण निषाद को लोकसभा का टिकट देकर सांसद बनाया. वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने एक बार फिर निषाद पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है. 

गृहमंत्री अमित शाह ने निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद से कई बार मुलाक़ात की. योगी सरकार ने मनोनयन कोटे से संजय निषाद को MLC भी मनोनीत किया है. अब देखना यह होगा कि 2022 में सपा-भाजपा की इस लड़ाई में निषाद (Nishad) वोट बैंक किस तरफ़ जाता है. कुल मिलाकर देखा जाए तो यूपी की पूरी चुनावी लड़ाई जातिगत समीकरण के इर्द गिर्द ही दिखाई दे रही है.

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