यूपी: 11 लेखपाल निलंबित, 106 ट्रेनी लेखपालों को सेवा समाप्ति का नोटिस

योगी सरकार ने महाराजगंज के 11 लेखपालों को सस्पेंड कर दिया है. 3 जुलाई से धरने पर हैं प्रदेश के लेखपाल.

यूपी: 11 लेखपाल निलंबित, 106 ट्रेनी लेखपालों को सेवा समाप्ति का नोटिस
(फोटो साभार सोशल मीडिया).

महराजगंज: शासन की चेतावनी के बाद भी धरना देने वाले जिले के 11 लेखपालों को जिला प्रशासन ने सस्पेंड कर दिया है, जबकि 106 ट्रेनी लेखपालों को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी कर दिया गया है. प्रशासन के इस सख्त फैसले से लेखपालों में हड़कंप मचा हुआ है. निलंबित होने वालों में लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष समेत अन्य सभी पदाधिकारी भी शामिल हैं. जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से लेखपालों को समझ नहीं आ रहा है कि वे इस सख्त फैसले के खिलाफ कैसे लड़ें? 

7 जुलाई से जिला मुख्यालय पर धरने पर थे
गौरतलब है कि विभिन्न मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ से जुड़े लेखपाल 3 जुलाई से धरना दे रहे थे. एक सप्ताह पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लेखपालों को चेतावनी दी थी कि वह काम पर लौट जाएं अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. लेकिन, लेखपालों ने इस चुनौती को स्वीकार कर धरना और तेज कर दिया. 7 जुलाई से जिला मुख्यालय पर जिला स्तरीय धरना देना शुरू कर दिया. 

एक हफ्ते पहले सरकार ने सख्‍त रुख अपनाने के दिए थे संकेत

लेखपाल संघ के पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
उधर शासन ने जिला प्रशासन से धरने में शामिल लेखपालों की रिपोर्ट मांगी थी. रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ने जिला प्रशासन को धरना देने वाले लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. इसी क्रम में जिलाधिकारी अमरनाथ उपाध्याय के निर्देश पर संबंधित तहसीलों के उप-जिलाधिकारियों ने 11 लेखपालों को निलंबित कर दिया है. निलंबित होने वालों में सभी लेखपाल संघ के पदाधिकारी शामिल हैं.

जुलाई में योगी सरकार ने कहा था, 6 महीनों तक हड़ताल नहीं करेंगे यूपी के लेखपाल

पिछले हफ्ते प्रदेश सरकार के प्रवक्‍ता और मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा था कि लेखपालों की हड़ताल को खत्‍म कराने के लिए प्रदेश की योगी सरकार सख्‍त रुख अपना सकती हैं. 8 जुलाई को इलाहाबाद पहुंचे सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि प्रदेश में लेखपालों की हड़ताल से आम जनता को काफी परेशानी हो रही है. उनके मुताबिक सरकार आम जनता के हितों के लिए है. इसलिए वह जनहित में हड़ताल खत्‍म कराने के लिए सख्‍त रुख अपना सकती है. हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा था कि लेखपालों से बातचीत के लिए रास्‍ते अभी भी खुले हुए हैं.

(इनपुट-आईएएनएस)