आज है झीलों की नगरी 'नैनीताल' का जन्मदिन, 1841 में वजूद में आया था यह खूबसूरत शहर

पी बैरन जब इंग्लैंड वापस लौटे तो, उन्होंने अपने यात्रा वृतांत कई समाचार पत्रों में प्रकाशित कराए और नैनीताल की चर्चा पूरी दुनिया में आ गई. 

आज है झीलों की नगरी 'नैनीताल' का जन्मदिन, 1841 में वजूद में आया था यह खूबसूरत शहर
नैनीताल को अंग्रेजों ने बेहद खास अंदाज में बसाया है. झील के चारों और करीब 64 नालों को बनाया.

नैनीताल: 18 नवम्बर की तारीख सरोवर नगरी के लिए बेहद खास है. खास हो भी क्यों ना इसी दिन नैनीताल दुनिया के सामने आया था. दरअसल, नैनीताल का जन्म 18 नवम्बर 1841 को पी बैरन नाम के व्यापारी ने किया था. इसी दिन पी बैरन ने नैनीताल का दस्तावेजीकरण किया था. हालांकि, उस समय कुमाऊं कमिश्नर ट्रेल 20 साल पहले ही नैनीताल आ चुके थे. लेकिन, नैनीताल की आबोहवा और झील की नैसर्गिक सौंदर्य बना रहे, इसलिए ट्रेल ने इसका प्रचार नही किया..

आखिर कैसे हुई झीलों के इस जादुई शहर की खोज
दरअसल, चीनी का व्यापार करने वाले अंग्रेज व्यापारी पी बैरन को पहाड़ में घूमने का शौक था. पहले पी बैरन बद्रीनाथ की तरफ गए और फिर कुमाऊं की तरफ आये. कुमाऊं में जब पी बैरन आए तो, उन्हें शेर का डांडा के पास एक सुंदर झील की जानकारी मिली. बैरन स्थानीय लोगों की मदद से पैदल सफर कर 2360 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस स्थान पर आए. जब पी बैरन ने ये खूबसूरत झील देखी तो, मंत्रमुग्ध रह गए. स्थानीय लोगों की मानें तो, इस शहर ने उन्हें बहुत कुछ दिया है. नैनीताल के स्थानीय निवासी विमल चौधरी कहते हैं कि शहर में खूबसूरती बनी रहे. साथ ही झील में जो प्रदूषित पानी जा रहा है, उसे रोका जाना चाहिए.

सैलानियों में नैनीताल के जमन्दिन को लेकर काफी उत्साह है
वहीं, पी बैरन जब इंग्लैंड वापस लौटे तो, उन्होंने अपने यात्रा वृतांत कई समाचार पत्रों में प्रकाशित कराए और नैनीताल की चर्चा पूरी दुनिया में आ गई. नैनीताल को अंग्रेजों ने बेहद खास अंदाज में बसाया है. झील के चारों और करीब 64 नालों को बनाया. शहर का सीवरेज सिस्टम भी आज भी वैसा ही है. पर्यटकों के लिए नैनीताल सपनों का शहर है. शहर में पर्यटक भी इस दिन को अलग अंदाज में मना की तैयारी कर रहे हैं. दिल्ली से आए पर्यटक नवीन सिंघल ने कहा कि दिल्ली में पूरी तरह प्रदूषण की चपेट में है और जब वो नैनीताल आते हैं तो, उन्हें स्वर्ग जैसा लगता है.

नैनीताल शहर को सजाने की नही इसके स्वास्थ्य का इलाज जरूरी है-शेखर पाठक
नैनीताल शहर ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं. इस शहर में 1880 में भूकंप आया था. जिसमें नैना देवी मंदिर भी क्षतिग्रस्त हो गया था. इतिहासकार शेखर पाठक कहते हैं कि नैनीताल शहर अब बीमार हो चुका है. नैनी झील में पूरे शहर का प्रदूषित पानी जा रहा है. झील के चारों तरफ घने जंगल भी धीरे-धीरे कटते जा रहे हैं. शहर अब कंक्रीट का जंगल बनता जा रहा है. नैनीताल के जन्मदिन को लेकर सैलानी भी काफी उत्साहित हैं. लेकिन, पिछले 20 सालों में बढ़ती आबादी और सैलानियों के दबाव से नैनीताल पर काफी दबाव बढ़ा है.