लखनऊ में 2020 में होने वाली रक्षा प्रदर्शनी के लिए अभी से बुक हुई 77 फीसदी जगह

48 देशों के उच्चायुक्तों और वरिष्ठ राजनयिकों सहित 83 देशों के प्रतिनिधियों ने रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित एंबेसडर राउंडटेबल में भाग लिया.

लखनऊ में 2020 में होने वाली रक्षा प्रदर्शनी के लिए अभी से बुक हुई 77 फीसदी जगह
लखनऊ में होने वाली इस रक्षा प्रदर्शनी को देशी विदेशी कंपनियों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है.

नई दिल्ली: लखनऊ में 2020 में होने वाली रक्षा प्रदर्शनी के लिए दुनिया भर की 278 कंपनियों ने अपनी भागीदारी पक्की कर ली है. 5 से 8 फरवरी तक चलने वाले रक्षा एक्सपो के 11 वें संस्करण में प्रदर्शनी में कंपनियों ने 77 प्रतिशत से अधिक जगह पहले ही बुक कर ली है और आने वाले दिनों में कुछ और कंपनियों के भी आने की उम्मीद है. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को दिल्ली में राजदूतों के गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षा उत्पादन में परिपक्व हो रहे भारत को आज मजबूत साझेदारियों की तलाश है और इसके लिए हमने इच्छुक कंपनियों को आवश्यक मंजूरी दिए जाने की दिशा में कई महत्त्वपूर्ण नीतिगत सुधार किए हैं.

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत रक्षा प्रौद्योगिकी में परिपक्व हो गया है और अब पारस्परिक लाभ के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी खोज रहा है. पिछले दो वर्षों में, भारत से रक्षा उत्पादन संबंधी निर्यात 7 गुना बढ़कर  1.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. इस अवसर पर बोलते हुए उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा कि निवेशकों के लिए राज्य में माकूल वातावरण है. हम समयबद्ध योजना के तहत निवेशकों की आवश्यकता के आधार पर बिजली, पानी, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधायें प्रदान करेंगे. उन्होंने कहा कि सड़क, रेल और हवाई मार्ग से उत्तर प्रदेश की बढ़िया कनेक्टिविटी है.

उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि इस चार दिवसीय रक्षा एक्सपो के माध्यम से, हम दुनिया की रक्षा-क्षेत्र की कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के फायदे बताना चाहते हैं. एक मजबूत कानून व्यवस्था बनाने के साथ साथ, राज्य में निवेश लाने का एक अनुकूल वातावरण बनाया गया है, जहां निवेश को इच्छुक कंपनियों को पारदर्शिता और तय समयसीमा के भीतर मंजूरी दी जाती है. हमने निवेशकों के समक्ष आने वाली सभी चुनौतियों को दूर करने के लिए निवेश-मित्र पोर्टल बनाया है. इसके माध्यम से सभी आवश्यक मंजूरी, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से दी जाती है.

48 देशों के उच्चायुक्तों और वरिष्ठ राजनयिकों सहित 83 देशों के प्रतिनिधियों ने रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित एंबेसडर राउंडटेबल में भाग लिया. लखनऊ में होने वाली इस रक्षा प्रदर्शनी को देशी विदेशी कंपनियों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है. रक्षा क्षेत्र की विदेशी और भारतीय कंपनियों ने प्रदर्शनी के लिए उपलब्ध स्थान का 77 प्रतिशत पहले ही बुक कर लिए हैं. जबकि पिछली बार चेन्नई में डिफेंस एक्सपो की तुलना में, इस बार प्रदर्शनी क्षेत्र के लिए 35 प्रतिशत अधिक स्थान आवंटित किया गया था.

उत्तर प्रदेश में निवेश करने वाली कंपनियों को राज्य में बनाये जा रहे डिफेन्स कॉरिडोर का भी लाभ मिलेगा. अवस्थी ने कहा कि कॉरिडोर में अलीगढ़, आगरा, झांसी, चित्रकूट, कानपुर और लखनऊ में छह नोड्स होंगे, जो राज्य में निवेश करने वाली कंपनियों को कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करेंगे. 

राज्य में पहले से ही 9 प्रमुख आर्डिनेंस कारखानें हैं, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की 3 प्रमुख इकाइयां, बीईएल की 1 इकाई और दो प्रमुख तकनीकी संस्थानों- आईआईटी कानपुर और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में आईआईटी का एक मजबूत शैक्षिक केंद्र हैं. अवस्थी ने बताया कि राज्य में 56 प्रतिशत आबादी काम करने वाली उम्र की है जिससे प्रदेश के पास बड़ा मानव संसाधन है. राज्य की कुल जनसंख्या 23 करोड़ के आसपास है. 

भारत पहले से ही सूचना प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहा है. लखनऊ में होने वाली इस रक्षा प्रदर्शनी की थीम डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन रखा गया है. इस डिफेंस एक्सपो का एक उद्देश्य मित्र देशों के साथ अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी विकसित करने के साथ साथ इस क्षेत्र का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन करना भी है. इससे पहले भारत के रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद नायक और रक्षा मंत्रालय के डिफेन्स प्रोडक्शन विभाग के सचिव सुभाष चंद्रा ने भी विश्व के रक्षा क्षेत्र में भारत के बढ़ते दखल पर अपने विचार साझा किए.