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राजधानी देहरादून में जहरीली शराब से 6 की मौत, कब सुधरेगा आबकारी विभाग?

इस घटना से लोगों में बहुत गुस्सा है. फिलहाल, मामले की जांच की जा रही है.

राजधानी देहरादून में जहरीली शराब से 6 की मौत, कब सुधरेगा आबकारी विभाग?

दिव्यांश शर्मा, देहरादून: देहरादून के पथरिया गांव में जहरीली शराब ने 6 लोगों को मौत की नींद सुला दिया. कई परिवारों में मातम पसरा हुआ है. गांव की गलियों में अभी भी सिसकियां सुनाई दे रही हैं. इस घटना के बाद सियासतदानों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की सियासी जंग शुरू हो गई है. दफ्तरों के एसी में सुकून से बैठे आबकारी विभाग के अधिकारियों की नींद एकबार फिर उड़ गई है.

जब 6 परिवार में मातम पसर गया है तो आबकारी विभाग के अधिकारी  रटे रटाये अंदाज में नकली शराब की धरपकड़ के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रहे हैं. पुलिस के तो होश उड़े हुए हैं. सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में पुलिस ही तो है. घटना के बाद से स्थानीय लोगों में पुलिस के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है. जिस इलाके में जहरीली शराब का कहर बरपा, उस पथरिया गांव के 2 किलोमीटर के दायरे में सचिवालय, राजभवन, पुलिस थाना और डीएम का आवास है. चंद कदमों की दूरी पर विधायक गणेश जोशी का निवास स्थल भी है. देहरादून का ये हाल है तो समझ लीजिए उत्तराखंड के दूर दराज इलाकों में नकली शराब का काला कारोबार किस स्तर तक फल फूल चुका होगा. संरक्षण की आबोहवा में कितने लोगों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है.

फरवरी 2019, 47 मौतें, नहीं लिया सबक
इसी साल फरवरी महीने में जहरीली शराब पीने से दस गांवों में 47 लोगों की मौत हो गई थी. सवाल तब भी खड़े हुए थे. प्रशासन कठघरे में खड़ा था. 13 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था. कुछ दिनों तक छापेमारी की कार्रवाई भी हुई. सख्ती का दौर बस चंद दिनों तक चला. सुस्ती की चादर ओढ़ कर आबकारी और पुलिस प्रशासन फिर सो गया. पहाड़ों में कच्ची शराब की भट्टियों का जाल बिछना बदस्तूर जारी रहा. शराब माफिया किसकी मदद से नकली शराब की खेप सप्लाई करते रहे, ये यक्ष प्रश्न आज भी बरकरार है.

जब तक मॉनिटरिंग नहीं, तब तक नकेल कसना नामुमकिन
पथरिया जहरीली शराब कांड में पुलिस पर गंभीर आरोप लग रहे हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुलिस से कई बार शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. पुलिस इस मामले में खुल कर बोलने से बचती नजर आ रही है. कोतवाल, चौकी इंचार्ज और दो आबकारी निरीक्षक अब तक सस्‍पेंड किए जा चुके हैं. आबकारी विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है. लेकिन, हादसा होने पर विभाग के जगने की आदत बहुत पुरानी है. इस बार भी ऐसा ही हुआ है. 

आबकारी विभाग की कार्रवाई में खानापूर्ति ही नजर आ रही है. क्या शराब माफियाओं को एक बार फिर बच निकलने का मौका दे दिया गया ? शराब माफियाओं की धरपकड़ के लिए शासन और प्रशासन के पास क्या एक्शन प्लान है ताकि भविष्य में ऐसी अनहोनी ना हो, इसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा है. सरकार को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से ले और आबकारी विभाग को सख्त निर्देश दिए जाएं जिससे पूरे प्रदेश में अवैध शराब कारोबार पर लगाम लग पाए.