झाड़ियों में मिली 6 महीने की बच्ची, एक-दो नहीं पूरे 250 लोग चाहते हैं इसके मां-पिता बनना

लावारिस हालत में मिली यह बच्ची अब मुरादाबाद से रामपुर के राजकीय बाल शिशु गृह आ गई है. 

झाड़ियों में मिली 6 महीने की बच्ची, एक-दो नहीं पूरे 250 लोग चाहते हैं इसके मां-पिता बनना
पिछले एक हफ्ते में 250 से ज्यादा लोगों ने बच्ची को गोद लेना चाहा. (फोटो फाइल)

मुरादाबाद : 9 फरवरी को सुबह के 6.30 बजे मुरादाबाद से करीब 15 किलोमीटर दूर, झाड़ियों में किसी बच्चे की आवाज आ रही थी. बच्चे की रोने की आवाज सुनकर गांव में रहने वाली जायदा वहां पहुंची, तो देखा कि एक मासूम जोर-जोर से रो रही है. कौन थी ये बच्ची? ये जायदा भी नहीं जानती थी लेकिन, उस बच्ची की मासूमता ने उस बच्ची को उठाने पर मजबूर कर दिया. जायदा ने बच्ची को उठाया और अपने सीने से लगा लिया. गुलाबी स्वेटर और लाल पायजामे में इस बच्ची को तो ये इल्म ही नहीं था, कि जिसके सीने से वो लगी है, वो उसकी मां नहीं है. बच्ची को सीने से लगाकर लेकर जायदा ये सोच रही थी कि काश! यह बच्ची मेरी अपनी ही होती. लावारिस हालत में मिली यह बच्ची अब मुरादाबाद से रामपुर के राजकीय बाल शिशु गृह आ गई है. 

बच्ची को गोद लेना चाहता था गांव का ही दंपत्ति  
जायदा बच्ची को गोद में लेकर अपने घर पहुंची और घर पहुंचने के बाद उसने गांव के लोगों को इस बारे में बताया. गांव में लोगों को बताने के बाद वहां रहने वाले एक दंपत्ति ने उसे गोद लेने की चाह जतायी. जायदा ने यासीन की पत्नी की गोद में बच्ची को दिया लेकिन, पुलिस के डर उस बच्ची को यासीन का होने नहीं दिया. मामला पुलिस तक पहुंचा. 

बच्ची से बेहतर हो जाती जिंदगी!
गांव की एक महिला शब्बो बच्ची को लेकर पुलिस वालों के साथ थाने में पहुंची. 5-6 घंटों की कार्रवाई के दौरान बच्ची उसके पास रही. पुलिस वालों से महिला ने बात कि की बच्ची को उसको दे दें. लेकिन पुलिस ने मना कर दिया. महिला का कहना था कि अगर बच्चा उसे दे दिया जाता, तो दोनों की जिंदगी बेहतर हो जाती.

 सिपाही भी लेना चाहता थी बच्ची को गोद
पुलिस ने बताया कि थाने में 5 से 6 घंटों के बीच बच्ची को गोद लेने के लिए कई लोग आए. जिसमे गांव के लोगों के अलावा पुलिस का एक सिपाही भी था. उसका कहना था कि भाई को बच्चे नहीं है अगर यह बच्ची मिल जाती तो उनकी जिंदगी बेहतर हो जाती. यही नहीं जब मैं बच्ची को लेकर मेडिकल कराने अस्पताल गया तो वहां भी एक साहब ने कहा बच्ची हमें दे दो. 

कल्याण समिति को सौंप दी थी बच्ची
कुंदरकी थाने से मुरादाबाद सीमा तक डायल 100 पर चलने वाले संग्राम यादव ने बचाया कि, 9 फरवरी को ही बच्ची को बाल कल्याण समिति मुरादाबाद को सौंप दिया गया था.
जहां बच्ची को गोद 250 से ज्यादा कॉल आ चुकी हैं. 

2 महीने तक किसी को नहीं दिया जाएगा गोद
बच्ची के असली माता-पिता कौन है? ये अभी तक कोई नहीं जानता. इसलिए 2 महीने बच्ची के असली माता-पिता का इन्तजार करेंगे. उसके बाद ही कोई प्रक्रिया शुरू होगी. अगर बच्ची के लिए कोई क्लेम करता है और हम संतुष्ट होते हैं तो, उन्हें बच्ची को सौंपा जा सकता है.

गोंद लेने के लिए CARA में करना होगा अप्लाई
बच्ची को अडॉप्ट करने के लिए फ़िलहाल सीएआरए यानि सेन्ट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी में अप्लाई करना होगा. लेकिन ये जरूरी नहीं कि आपको यह बच्ची ही मिलेगी क्योंकि पहले जिस बच्चे का नंबर होगा उसको अडॉप्ट करना होगा.

रामपुर के बाल शिशु गृह में हैं 35 बच्चे
रामपुर के राजकीय बाल शिशु गृह में छह महीने की बच्ची समेत 35 बच्चों की देखभाल के लिए तीन शिफ्ट में दो-दो लड़कियां मौजूद रहती हैं. यहां कुल 14 लोगों का स्टाफ मौजूद है. 

शिशु गृह की 'परी' है नन्ही मासूम
शिशु गृह में इस बच्ची को परी नाम से पुकारा जा रहा है. यहां काम करने वाली महिलाओं ने बताया कि शिशु गृह में हम इसे परी कहते हैं, क्योंकि इस बच्ची की स्माइल बहुत ही अच्छी है. ये बच्ची अभी दूध और दाल का पानी वगैरह ही पी रही है.
सवाल ये कि क्या इस बच्ची की मां की ममता मर चुकी थी, जो इस बच्ची को इस तरह झाड़ियों में फेंक दिया? क्या पिता के लाड़ ने भी उसको ये करने से नहीं रोका? क्या बच्ची को किसी रंजिश में लेकर आया है और उसे फेंक गया है? सवाल बहुत हैं. जिनकी तलाश के लिए पुलिस प्रशासन लगा हुआ है, ताकि इस बच्ची को इसके असली मां-बाप से मिलाया जा सके.