20 साल तक रहे लिव इन में, अब 70 साल के दूल्हे और 64 साल की दुल्हन ने रचाया ब्याह

उड़िया बोलने के कारण गोली की भाषा कोई नहीं समझ पाता लेकिन कहते हैं ना की प्रेम की कोई भाषा नहीं होती, तो बैजू गोली की सभी बातें आसानी से समझ जाते हैं.

20 साल तक रहे लिव इन में, अब 70 साल के दूल्हे और 64 साल की दुल्हन ने रचाया ब्याह
बैजू कुशवाहा और गोली देवी की प्रेम कहानी

ललितपुर: 14 फरवरी यानी Valentines day 'प्यार करने वालों का दिन' आप लोगों ने प्यार की बहुत सी कहानियां और किस्से सुने होंगे लेकिन ये अजब प्रेम की कहानी जो आप पढ़ने वाले हैं उसे देख कर आप भी सोचने को मजबूर हो जाएंगे कि आज के समय में भी क्या प्यार की ऐसी कहानी भी हो सकती है? उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में ललितपुर जिले के तालबेहट तहसील के रहने वाले 70 साल के बैजू कुशवाहा ने आज से 4 साल पहले 14 फरवरी के दिन अपनी 64 वर्ष की प्रेमिका गोली देवी से 20 साल तक एक साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद हिंदू रीति रिवाजों से शादी की और साथ ही एक-दूसरे के साथ अपनी बाकी की बची जिंदगी ही नहीं बल्कि और सात जन्म एक साथ रहने का वादा कर लिया. 

बैजू कुशवाहा और गोली देवी की प्रेम कहानी बॉलीवुड की किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है. बैजू ने बताया कि आज से 24 साल पहले मैं जब एक शादी के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अपने घर लौट रहा था तब मैंने ललितपुर स्टेशन पर एक महिला को फूट-फूटकर रोते हुए देखा. फिर काफी देर होने के बाद जब वो नहीं चुपी तो मैंने पास जाकर उससे रोने का कारण पूछा. लेकिन उड़िया भाषा में बोलने की वजह से मैं उसकी महिला की बात ठीक से नहीं समझ पा रहा था. फिर उसने मुझे अपनी टूटी-फूटी हिंदी में समझाया कि मेरा नाम गोली देवी है. मेरे शराबी पति ने मुझे मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया है और फिर मैं ट्रेन में बैठकर यहां तक आ गई. लेकिन अब मैं कहां जाऊं, क्या करूं मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है.

मैंने गोली की परेशानी देखकर उसकी मदद करने का फैसला लिया और फिर गोली को अपने साथ घर ले आया. मैंने गोली के परिवार वालों को भी ढूंढने की बहुत कोशिश की लेकिन कुछ पता नहीं चला. इसके बाद हम दोनों ने एक-दूसरे के साथ रहने का फैसला कर लिया. फिर हम दोनों को साथ में रहते-रहते काफी दिन गुजर गए और साथ में रहते-रहते हमें कब एक-दूसरे से प्यार हो गया हमें पता ही नहीं चला. पिछले 20 सालों तक एक-दूसरे के साथ प्यार से रहने के बाद मुझे को लगा कि शायद ये जिंदगी हम दोनों के एक साथ रहने के लिए कम पड़ेगी तो आज से 4 साल पहले गोली से बुंदेलखंडी रीती रिवाज से मटक विवाह कर लिया और फिर गोली और मैं सात जन्मों के साथी बन गए.

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आपको बता दें कि उड़िया बोलने के कारण गोली की भाषा कोई नहीं समझ पाता लेकिन कहते हैं ना की प्रेम की कोई भाषा नहीं होती, तो बैजू गोली की सभी बातें आसानी से समझ जाते हैं. वहीं एक पैर से विकलांग बेजू का सहारा बनकर गोली देवी उनका पूरा साथ निभा रही हैं.

क्या होता है मटक विवाह?

बैजू कुशवाहा और गोली देवी का विवाह करवाने वाले पंडित रामेश्वर लिटोरिया ने बताया कि हिन्दू रीती रिवाज के अनुसार जब किसी महिला का एक बार विवाह हो जाता है और वो एक बार सात फेरे ले चुकी होती है तो वह दूसरी बार सात फेरे नहीं ले सकती है. जिस वजह से बैजू और गोली को मटक विवाह करना पड़ा. मटक विवाह में मटके के साथ मटके को अपनी पत्नी मानकर सात फेरे लेता है. फेरे लेने से पहले मटके को किसी नई दुल्हन की तरह सजाया जाता है. इसमें दूल्हा मटके को सिंदूर लगाता है, मंगल सूत्र पहनाता है और फिर दूल्हा मटके को लेकर सात फेरे लेता है. जिसके बाद उसका विवाह संपन्न हो जाता है.