Agra News: आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) की टीम की बड़ी लापरवाही सामने आई है. परिवार समेत बिल्डिंग को सील कर दिया गया. जिससे बच्चे सहित परिवार के सदस्य करीब 4 घंटे तक बंद रहे. सूचना के बाद टीम ने सील खोलकर परिवार को बाहर निकाला.
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Agra News/कपिल अग्रवाल: आगरा के शाहगंज क्षेत्र के अर्जुन नगर में अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने पहुंची आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) की टीम पर गंभीर आरोप लगे हैं. एडीए के शाहगंज स्थित अर्जुन नगर में जूनियर इंजीनियर की बड़ी लापरवाही सामने आई है. आरोप है कि परिवार सहित बिल्डिंग को सील कर दिया गया है.
पीड़ित परिवार ने लगाए ये आरोप
परिवार का कहना है कि बिना सूचना बिल्डिंग सील कर दी गई, जिससे बच्चे सहित सभी सदस्य करीब 4 घंटे तक अंदर बंद रहे. सूचना मिलने के बाद टीम ने सील खोलकर परिवार को बाहर निकाला. इस मामले में विभागीय लापरवाही पर सवाल खड़े हो रहे हैं. भवन स्वामी का आरोप है कि विभाग के द्वारा बिल्डिंग मालिक को कोई सूचना नहीं दी गई थी. अगर परिवार के साथ कोई घटना होती तो कौन जिम्मेदार होता. लगभग 4 घंटे के बाद सूचना मिलने पर आगरा विकास प्राधिकरण की टीम ने भवन की सील खोलकर परिवार को बाहर निकाला. यह मामला आगरा के थाना शाहगंज क्षेत्र के अर्जुन नगर का है.
69 दुकानों और होटल के भविष्य पर संकट
उधर, शहर के एमजी रोड स्थित राजामंडी बाजार में लाभचंद्र मार्केट, उसके ऊपर बने होटल धर्मलोक और चंद्रलोक सड़क की जमीन पर खड़े हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित 12 सदस्यीय कमेटी की जांच में यह खुलासा हुआ है. 1929 के राजस्व रिकॉर्ड से निरस्त लीज पर खड़े अवैध निर्माण के साम्राज्य की पोल खुली है. ऐसे में अब लाभचंद्रर मार्केट में 69 दुकानों और होटल के भविष्य पर संकट के बादल गहरा रहे हैं.
रिपोर्ट में हुआ ये बड़ा खुलासा
इस रिपोर्ट कमेटी ने 28 फरवरी को एडीएम प्रोटोकॉल के जरिए डीएम को सौंपी थी. जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि लाभचंद्र मार्केट का एक बड़ा हिस्सा उस सार्वजनिक सड़क पर बना है, जो दशकों पहले राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी. उप जिलाधिकारी सदर सचिन राजपूत के नेतृत्व में गठित समिति ने जांच रिपोर्ट में लिखा है कि नगर निगम की ओर से इस जमीन की लीज एक साल पहले ही निरस्त की जा चुकी है, उस पर बना निर्माण अब अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में आता है.
100 साल पुराने नक्शों ने दी गवाही
सुप्रीम कोर्ट के आदेश याचिका संख्या-27640/2025 के अनुपालन में 10 फरवरी 2026 को भारी फोर्स के बीच मार्केट की पैमाइश की गई थी. जांच समिति ने 1874 और 1923 के जीर्ण-शीर्ण अभिलेखों को पैमाइश के लिए उपयुक्त नहीं पाया. आखिरकार 1929-1930 की नजूल सर्वे शीट संख्या-66 को सबसे प्रामाणिक दस्तावेज माना गया, जिसमें लीज दिए जाने से पूर्व ही उक्त स्थान पर सार्वजनिक रास्ता स्पष्ट रूप से अंकित था.
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