अयोध्‍या मामले पर AIMPLB बोला, 'आस्‍था नहीं मिल्कियत की बुनियाद पर हो फैसला'

रविवार को दिल्‍ली में हुई ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की वर्किंग कमेटी की बैठक. 

अयोध्‍या मामले पर AIMPLB बोला, 'आस्‍था नहीं मिल्कियत की बुनियाद पर हो फैसला'
AIMPLB के सचिव जफरयाब जिलानी ने दी जानकारी. (फोटो ANI)

नई दिल्‍ली : अयोध्‍या में राम मंदिर मामले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की रविवार को दिल्‍ली में बैठक हुई. इसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की वर्किंग कमेटी के सदस्‍यों ने हिस्‍सा लिया. बैठक के बाद बोर्ड ने फिर इस बात को दोहराया है कि अयोध्‍या में बाबरी मस्जिद है और वो मुसलमानों की नजर में हमेशा बाबरी मस्जिद रहेगी. शरिया अदालतों को लेकर आ रही खबरों को लेकर चर्चाओं पर बोर्ड ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी. बोर्ड ने इस मामले में कहा कि बोर्ड देश में कोई समानांतर अदालत खोलने नहीं जा रहा है. बल्कि दारुल कजा देशभर में पहले से ही चल रहे हैं. दिल्‍ली में 15 जुलाई को AIMPLB की वर्किंग कमेटी की बैठक में बोर्ड के महासचिव वली रहमानी, सचिव जफरयाब जिलानी और कमाल फारूकी समेत कई सदस्‍य मौजूद रहे.

मिल्कियत की बुनियाद पर आए अयोध्या का फैसला
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने फिर अपनी बात दोहराते हुए कहा कि अयोध्या में मस्जिद थी और मुसलमानों की नजरों में हमेशा मस्जिद रहेगी. बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने कहा ये मामला मिल्कियत का मामला है और इसी की बुनियाद पर फैसला आना चाहिए. बोर्ड ने अपनी मीटिंग में एलान किया कि वो अयोध्या मामले में कानूनी लड़ाई और मजबूती से लड़ेगा. 2019 के पहले राम मंदिर निर्माण मामले में बोर्ड की तरफ से कहा गया कि मामला कोर्ट में है. जो फैसला वहां से आएगा वो सबको मंजूर होगा.

दारुल कजा की इजाजत सुप्रीम कोर्ट देता है
बोर्ड की बैठक में सामने आया कि देश के तीन शहरों में हाल ही में दारुल कजा या शरिया अदालतें शुरू की गई हैं. इनमें कन्नौज भी शामिल है. इसके अलावा देशभर के करीब दस शहरों से दारुल कजा खोलने के प्रस्ताव आए हैं. दारुल कजा को लेकर चल रहे विवाद पर भी बोर्ड ने सफाई दी. बोर्ड की तरफ से कहा गया कि देश में मुकदमों का वजन कम करने के लिए दारुल कजा जरूरी है. ये कोई समानांतर कोर्ट नहीं है बल्कि कुरान और हदीस की रोशनी में मुसलमानों के आपसी मामलों को निपटाने का ये मंच है. हालांकि भारत मे दारुल कजा की कोई कानूनी हैसियत नहीं है.

समलैंगिकता जुर्म है
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपनी बैठक में समलैंगिकता के खिलाफ प्रस्ताव पास करते हुए इसे जुर्म करार दिया. बोर्ड की तरफ से कहा गया कि सरकार को कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे समलैंगिकता को बढ़ावा मिले. ये एक जुर्म है, इससे समाज में असंतुलन की स्थिति पैदा हो सकती है.

जदीद पर बोर्ड ने दिया बयान
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नाम से खुलने वाले संगठनों को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने निशाना साधा. बोर्ड की तरफ से जफरयाब जिलानी ने कहा कि सबको अपने-अपने तरीके से काम करने मे हक हासिल है. लेकिन वो कोई इस सिलसिले में व्यक्तिगत अटैक नहीं करेंगे. इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जदीद ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर निशाना साधा था. इसपर आज पर्सनल लॉ बोर्ड ने सफाई पेश की और कहा कि वो बरेली का बोर्ड कई साल से चल रहा है. 

बोर्ड बीजेपी-आरएसएस का एजेंट नहीं -जफरयाब जिलानी
तीन तलाक और निकाह हलाला जैसे मुद्दों पर घिरे पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मामले पर भी सफाई पेश की. जफरयाब जिलानी ने कहा कि बोर्ड को बदनाम करने के लिए ऐसे बेतुके शिगूफे छोड़े जाते हैं. बोर्ड अपनी जिम्मेदारी समझते हुए काम कर रहा और करता रहेगा.

मुस्लिम औरतों के लिए बयान नहीं काम करने की जरूरत- बोर्ड
तीन तलाक़ मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पीएम मोदी को लेकर सवाल खड़े किए और कहा कि मुस्लिम औरतोंं को लेकर अगर वाकई पीएम फिक्रमंद हैं तो उन्हें राज्यों के वक्‍फ बोर्डों को मदद देनी चाहिए ताकि यहां से मुस्लिम औरतों को पेंशन मिल सके. बैठक के दौरान फिर से तीन तलाक बिल का विरोध किया गया. इसके तहत तलाक बिल के खिलाफ सड़कों पर उतरने वाली मुस्लिम औरतों का हवाला दिया गया.