अलीगढ़: झूठी, भडकाऊ खबर फैलाने के लिए 11 लोगों पर मामला दर्ज, 1 दिन और बंद रहेगा इंटरनेट

अलीगढ़: झूठी, भडकाऊ खबर फैलाने के लिए 11 लोगों पर मामला दर्ज, 1 दिन और बंद रहेगा इंटरनेट

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि ने संवाददाताओं को बताया कि पिछले दो दिन के दौरान झूठी और भडकाऊ खबर फैलाने के लिए सिविल लाइंस थाने में 11 लोगों के खिलाफ आईटी कानून के तहत मामले दर्ज किये गये हैं.

अलीगढ़: झूठी, भडकाऊ खबर फैलाने के लिए 11 लोगों पर मामला दर्ज, 1 दिन और बंद रहेगा इंटरनेट

अलीगढ (उत्तरप्रदेश): जिला प्रशासन ने खैर तहसील में इंटरनेट सेवाओं पर लगाया प्रतिबंध मंगलवार को एक दिन और बढ़ा दिया. टप्पल कस्बे में हालात अब धीरे धीरे सामान्य हो रहे हैं. जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह ने बताया कि खैर कस्बे में इंटरनेट सेवाओं पर लगाया गया प्रतिबंध एक दिन के लिए और बढा दिया गया है. सोशल मीडिया का दुरूपयोग रोकने की नीयत से प्रतिबंध सोमवार को लगाया गया था. ढाई साल की बच्ची की नृशंस हत्या के बाद कोई असामाजिक तत्व गलत या भडकाऊ पोस्ट ना करने पाये, इस मकसद से इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया. सिंह ने मंगलवार जारी बयान में कहा कि टप्पल में हालात शांतिपूर्ण हैं.

एहतियातन सुरक्षा प्रबंध कडे़ रखे गये हैं. उधर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि ने संवाददाताओं को बताया कि पिछले दो दिन के दौरान झूठी और भडकाऊ खबर फैलाने के लिए सिविल लाइंस थाने में 11 लोगों के खिलाफ आईटी कानून के तहत मामले दर्ज किये गये हैं. रविवार को हालात काबू करने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी थी.

प्रदर्शनकारी प्रशासन से मांग कर रहे थे कि ढाई साल की बच्ची की हत्या के मामले में तत्काल न्याय मिले. पुलिस ने दक्षिणपंथी समूहों द्वारा किये गये प्रदर्शन को किसी तरह नियंत्रित किया . ये लोग टप्पल में महापंचायत करना चाह रहे थे. बताया जाता है कि महापंचायत की सूचना किसी हिन्दुत्व समूह ने सोशल मीडिया पर दी थी.

आसपास के जिलों के लोग भी महापंचायत में शामिल होने का प्रयास कर रहे थे लेकिन पुलिस ने टप्पल कस्बे में प्रवेश के रास्तों पर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया. कुलहरि ने इन खबरों को गलत बताया कि टप्पल में असुरक्षित महसूस कर रहे एक समुदाय के लोग पलायन कर रहे हैं.

कुलहरि ने कहा कि कुछ लोग अस्थायी तौर पर जा सकते हैं लेकिन जल्द लौट आएंगे. टप्पल में निषेधाज्ञा लागू है. ढाई साल की बच्ची की हत्या के बाद कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो और टिप्पणी डालकर अफवाह फैला रहे थे.

 

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