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Zee UP-UttarakhandPhotos‘घंटी और घुंघरू का शहर' है भारत का ये जिला, कीचड़ और तांबे के मेल से कारीगर गढ़ते हैं नायाब कला!
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‘घंटी और घुंघरू का शहर' है भारत का ये जिला, कीचड़ और तांबे के मेल से कारीगर गढ़ते हैं नायाब कला!

City of Anklet Bells in UP: उत्तर प्रदेश के 75 जिले की अलग-अलग विविधता और संस्कृति है. लेकिन इन जिलों में से एक जिला एक ऐसा भी है, जिसे हम घूंघरू और घंटी के लिए जानते हैं. आइए इस शहर के बारे में जानते हैं.

'घंटी और घुंघरू का शहर'

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'घंटी और घुंघरू का शहर'

उत्तर प्रदेश के हम जिस सिटी की बात कर रहे हैं वो 'घंटी और घुंघरू का शहर'  कहा जाता है. यह शहर अपनी प्राचीन निर्माण कला और पीतल उद्योग के लिए विश्व प्रसिद्ध है. आइए जानते हैं इसके बारे में.

सदियों पुरानी पारंपरिक कला

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सदियों पुरानी पारंपरिक कला

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित जलेसर (Jalesar) शहर को घंटी और घुंघरू का शहर कहा जाता है.  यह अपनी सदियों पुरानी पारंपरिक कला, विशेष रूप से तांबे और पीतल से बनी बड़ी घंटियों और नर्तकियों के लिए घुंघरूओं के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत पहचान मिली है

 

क्यों कहा जाता है 'घंटी और घुंघरू का शहर'

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क्यों कहा जाता है 'घंटी और घुंघरू का शहर'

इस शहर का नाम है एटा, जलेसर. उत्तर प्रदेश सरकार ने एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत एटा जिले में इस उत्पाद की पहचान की है.  उत्तर प्रदेश की ओडीओपी वेबसाइट के मुताबिक, एटा जिले में जलेसर शहर एक एतिहासिक शहर है, जो कि मगध के राजा जरासंध की राजधानी हुआ करता था

 

कैसे होता है तैयार

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कैसे होता है तैयार

यहां पर कीचड़, सफेद पाउडर और तांबे से घुंघरू और घंटियों को तैयार किया जाता है. इस शहर में बड़ी मात्रा में इन उत्पादों को तैयार किया जाता है.  ऐसे में ओडीओपी योजना के तहत इस जिले को यह पहचान मिली है.  

जलेश्वर-पीतल और कला का संगम

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जलेश्वर-पीतल और कला का संगम

जलेश्वर के कारीगरों द्वारा बनाई गई घंटियों की गूंज विदेशों तक सुनाई देती है. यहां पीतल की ढलाई का काम सदियों से पारंपरिक तरीके से किया जा रहा है. एटा के घुंघरू की डिमांड दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, मलेशिया, कंबोडिया और साउदी अरब जैसे देशों में है. जार्डन, यूएई जैसे मध्‍य पूर्व के देशों में भी एटा के घुंघरू को बड़ा बाजार मिल गया है. यहाँ के घुंघरू अपनी मधुर ध्वनि और बारीक बनावट के लिए जाने जाते हैं, जिनका उपयोग शास्त्रीय नृत्य (जैसे कथक) और मंदिरों में बड़े पैमाने पर होता है.

 

अयोध्या राम मंदिर से नाता

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अयोध्या राम मंदिर से नाता

अयोध्या के भव्य राम मंदिर के लिए 2100 किलो की विशालकाय घंटी जलेश्वर में ही तैयार की गई थी, जिसने इस शहर को हाल के दिनों में और भी ज्यादा प्रसिद्धि दिलाई है।

 

ODOP योजना

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ODOP योजना

उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जनपद, एक उत्पाद'योजना के तहत एटा जिले के इस घुंघरू और घंटी उद्योग को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है. इस जिले में 3 तहसील, 8 ब्लॉक, 855 गांव और 5487 पंजीकृत औद्योगिक इकाइयां हैं. यहाँ लगभग 60,000 की आबादी में बड़ी संख्या में लोग घंटी और घुंघरू बनाने के उद्योग में लगे हैं.

डिस्क्लेमर

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डिस्क्लेमर

लेख में दी गई ये जानकारी सामान्य स्रोतों से इकट्ठा की गई है. इसकी प्रामाणिकता की जिम्मेदारी हमारी नहीं है. AI के  काल्पनिक चित्रण का जी यूपीयूके हूबहू समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता.