इलाहाबाद हाई कोर्ट ने योगी सरकार से पूछा- प्राइवेट अस्पतालों को कोरोना टेस्ट की इजाजत क्यों नहीं?

जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस यशवंत वर्मा की डिवीजन बेंच ने यूपी सरकार से पूछा कि ऐसे क्या इंतजाम किए गए हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों की कोरोना जांच हो सके, जांच में कम खर्च आए और रिपोर्ट भी जल्द मिले? 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने योगी सरकार से पूछा- प्राइवेट अस्पतालों को कोरोना टेस्ट की इजाजत क्यों नहीं?
फाइल फोटो

मोहम्मद गुफरान/प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि प्राइवेट हॉस्पिटल्स को कोरोना टेस्ट करने की इजाजत क्यों नहीं दी जा रही है? साथ ही हाईकोर्ट ने योगी सरकार से उत्तर प्रदेश में कोरोना के टेस्ट के लिए किए इंतेजामों की भी जानकारी मांगी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में गुरुवार को गौतमबुद्ध नगर में समय पर इलाज न मिलने की वजह से हुई गर्भवती महिला की मौत सहित कई अन्य मामलों में दाखिल जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील विशाल तलवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस यशवंत वर्मा की डिवीजन बेंच ने यूपी सरकार से पूछा कि ऐसे क्या इंतजाम किए गए हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों की कोरोना जांच हो सके, जांच में कम खर्च आए और रिपोर्ट भी जल्द मिले? हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि जो प्राइवेट अस्पताल ट्रूनेट मशीनें लगाकर कम खर्च में कोरोना जांच करना चाहते हैं, उन्हें इजाजत देने में क्या दिक्कत है?

हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया है, इस मामले में अब अगली सुनवाई तीन जुलाई को होगी. दरअसल, नोएडा में गर्भवती महिला की मौत के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर कोरोना की वजह से प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों में बंद चल रही ओपीडी को खोले जाने की मांग की गई थी. उस मामले में हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब तलब किया था.

हाईकोर्ट द्वारा जवाब मांगे जाने पर योगी सरकार ने शर्तों के साथ ओपीडी चलाए जाने की मंजूरी दे दी थी. वहीं, यूपी सरकार ने गुरुवार को हाईकोर्ट में बताया कि दो राउंड में ज्यादातर अस्पतालों की ओपीडी खोले जाने की मंजूरी दे दी गई है. तीसरे फेज में सभी ओपीडी चालू कर दी जाएंगी. याचिकाकर्ता विशाल तलवार, विनायक मिश्रा और आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने एक अन्य याचिका में प्रदेश के प्राइवेट अस्पतालों में भी कोरोना टेस्ट की इजाजत दिए जाने की मांग की.

याचिकाकर्ताओं के वकील ने हाईकोर्ट के सामने दलील दी कि सरकारी लैब की रिपोर्ट तीन दिन में आती है. ऐसे में प्राइवेट अस्पतालों में आने वाले मरीजों का न तो ऑपरेशन हो पाता है न ही गंभीर मरीजों का इलाज. अगर प्राइवेट अस्पतालों में ट्रूनेट मशीनों से रैपिड जांच की अनुमति दे दी जाए तो ज्यादा से ज्यादा मामले सामने आ जाएंगे और साथ ही कम खर्च व कम वक्त में रिपोर्ट भी आ जाएगी.