निजी फायदे के लिए कोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर करना अनुचित: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये तल्ख टिप्पणी धर्मेंद्र मिश्रा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दी. न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति एसडी सिंह की पीठ ने धर्मेंद्र मिश्रा की याचिका सुनते हुए कहा कि याचिका बहुत ही सतही तरीके और बिना तथ्यों के दाखिल की गई है. 

निजी फायदे के लिए कोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर करना अनुचित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रतीकात्मक फोटो

निजी हित अथवा किसी तीसरे पक्ष का हित साधने के लिए कोर्ट में दाखिल होने वाली जनहित याचिकाओं को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिकाओं की आड़ में हित साधने की कोशिशें बंद होनी चाहिए. उन्होंने निजी हित साधने वाली याचिकाओं को खारिज किए जाने की भी बात कही. कोर्ट ने कहा कि कोर्ट ने कहा कि कुछ लोग अक्सर कोर्ट में ऐसी याचिकाएं दाखिल कर रहे हैं, जिनमें व्यक्तिगत हित या फिर उसकी आड़ की किसी तीसरे पक्ष का हित शामिल होता है. उसके लिए अदालत को जरिया बनाया जा रहा है. ऐसे में इन याचिकाओं को खारिज करना ही बेहतर है. 

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नोएडा अथॉरिटी के ई-टेंडर की याचिका पर थी सुनवाई 
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये तल्ख टिप्पणी धर्मेंद्र मिश्रा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दी. न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति एसडी सिंह की पीठ ने धर्मेंद्र मिश्रा की याचिका सुनते हुए कहा कि याचिका में नोएडा अथॉरिटी द्वारा 3 जून 2020 को जारी किए गए ई-टेंडर की दो शर्तों को चुनौती दी गई है. याचिका बहुत ही सतही तरीके और बिना तथ्यों के दाखिल की गई है. कोर्ट ने टिप्पणी की है कि याचिका पूरी तरह से भ्रमित है और याची धर्मेंद्र मिश्रा अथॉरिटी की आमदनी में दखल देना चाह रहा है. कोर्ट ने धर्मेंद्र मिश्रा की याचिका खारिज कर दी. 

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