'आश्रय गृहों में बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने की समय सीमा बताए यूपी सरकार' : HC

राज्य सरकार के महिला कल्याण विभाग ने अदालत को सूचित किया कि वह अपर्याप्त कोष की वजह से आश्रय गृहों में सीसीटीवी सहित बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं करा सकता.

'आश्रय गृहों में बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने की समय सीमा बताए यूपी सरकार' : HC
(फाइल फोटो)

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार को पूरे प्रदेश में आश्रय गृहों में सीसीटीवी लगवाने समेत बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने की समय सीमा बताने को कहा. यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की पीठ ने उस समय पारित किया, जब राज्य सरकार के महिला कल्याण विभाग ने अदालत को सूचित किया कि वह अपर्याप्त कोष की वजह से आश्रय गृहों में सीसीटीवी सहित बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं करा सकता.

धन की कमी को सरकार नहीं बता सकती कारण- हाईकोर्ट 
इस पर पीठ ने पूछा, "राज्य सरकार यह कैसे कह सकती है कि वह धन की कमी की वजह से आश्रय गृहों में बच्चों के संरक्षण के लिए कानून द्वारा प्रदत्त दिशानिर्देशों का अनुपालन नहीं कर सकती." अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने हलफनामा दाखिल कर अदालत को सूचित किया कि उन 35 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है, जिन्होंने यह जानते हुए कि राज्य सरकार द्वारा लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है, 121 लड़कियों को देवरिया आश्रय गृह में भेजा.

हाईकोर्ट ने देवरिया आश्रय गृह मामले का लिया था स्वत: संज्ञान 
गौरतलब है कि आठ अगस्त को इस अदालत ने देवरिया आश्रय गृह मामले पर समाचार पत्रों में छपी खबर का स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा था कि वह उस आश्रय गृह से चलाए जा रहे कथित सेक्स रैकेट मामले की जांच की निगरानी करेगी. इससे पूर्व, पांच अगस्त को पुलिस ने देवरिया आश्रय गृह पर छापा मारकर 24 लड़कियों को मुक्त कराया था. पुलिस ने यह कार्रवाई तब की थी, जब उस आश्रय गृह से भागी एक लड़की ने पुलिस को आश्रय गृह में चल रहे कारनामों की जानकारी दी थी.

(इनपुट भाषा से)