महिलाएं आनंद की वस्तु हैं ऐसी वर्चस्ववादी मानसिकता से सख्ती से निपटना जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा शादी करने का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाना दुष्कर्म के श्रेणी का अपराध होना चाहिए.

महिलाएं आनंद की वस्तु हैं ऐसी वर्चस्ववादी मानसिकता से सख्ती से निपटना जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Allahabad High Court (File Photo)

मो. गुफरान/प्रयागराज: शादी का वादा कर महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने योगी सरकार (Yogi Goverment) से कानून बनाने को कहा है. हाईकोर्ट ने ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए सरकार से मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करने को कहा है. कोर्ट ने कहा ''महिलाएं आनंद की वस्तु हैं'' ऐसी वर्चस्ववादी मानसिकता से सख्ती से निपटना जरूरी है.ताकि महिलाओं में सुरक्षा की भावना और लैंगिक असमानता को दूर करने के संवैधानिक लक्ष्य को पाया जा सके.जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ ने यह आदेश दिया है. 

 यौन उत्पीड़न करने वालों को लाइसेंस नहीं दिया सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट 
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा शादी करने का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाना दुष्कर्म के श्रेणी का अपराध होना चाहिए. शादी के नाम पर महिलाओं को आसानी से शिकार बनाया जा रहा है. कोर्ट ने कहा ऐसे मामलो में अदालते मूकदर्शक नहीं बन सकती हैं. यौन उत्पीड़न करने वालों को लाइसेंस नहीं दिया जा सकता, जो मासूम लड़कियों का शोषण करतें हैं. 

महिलाओं के दिमाग पर पड़ता है प्रभाव: इलाहाबाद हाईकोर्ट 
हाई कोर्ट ने आगे कहा कि दुष्कर्म जैसी घटनाओं के बाद महिला के जीवन और मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है.सरकार ऐसे मामलो से निपटने के लिए स्पष्ट और विशेष कानूनी ढांचा तैयार करे. खासकर एक बार या फिर कम समय के लिए यौन संबंध बनाने के मामलो पर यह कानून जरूर लागू हो.कोर्ट ने कहा जब तक कानून नहीं बन जाता, तब तक ऐसी घटनाओं में पीड़ित महिलाओं को मानवीय आधार पर सरंक्षण दिया जाए. 

इस मामले में दिया आदेश 
कानपुर के हर्षवर्धन यादव की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया है. अभियुक्त हर्षवर्धन यादव पर पीड़िता से शादी के नाम पर यौन संबंध बनाने का आरोप है. आरोप है कि यौन संबंध बनाने के बाद वह शादी से मुकर गया था. इस दौरान आरोपी ने पीड़िता को जातिसूचक गालियां दी और अपशब्द भी कहा था. 

कोर्ट ने अभियुक्त की मंशा को भांपते हुए कहा कि याचिका में कहीं पर भी शादी की इच्छा नहीं जाहिर की है. इससे लगता है कि शादी के नाम पर उद्देश्य में सफल होते ही शादी से इंकार कर दिया. पीड़िता ने कानपुर के कलेक्टरगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी. 

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