इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीएम योगी को दी बड़ी राहत, गोरखपुर दंगे की अर्जी खारिज

कोर्ट ने याचिका में सीएम योगी आदित्यनाथ पर लगाये गए दंगे भड़काने के आरोप को सही नहीं माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीएम योगी को दी बड़ी राहत, गोरखपुर दंगे की अर्जी खारिज
योगी आदित्यनाथ के साथ ही तत्कालीन मेयर अंजू चौधरी, विधायक राधा मोहन अग्रवाल व अन्य को भी बड़ी राहत मिली (फाइल फोटो)

इलाहाबाद: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 11 साल पुराने एक मामले में बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने सीएम योगी के खिलाफ 2007 में गोरखपुर के दंगे को भड़काने के आरोप में मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिका में सीएम योगी आदित्यनाथ पर लगाये गए दंगे भड़काने के आरोप को सही नहीं माना है. साथ ही इस मामले में सरकार की तरफ से योगी आदित्यनाथ और अन्य के खिलाफ मामला न चलाए जाने के फैसले को सही माना है. इसके साथ ही कोर्ट ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग को भी खारिज कर दिया है.

योगी आदित्यनाथ के अलावा इनको भी मिली बड़ी राहत
आपको बता दें कि इस बहुचर्चित मामले में योगी आदित्यनाथ के साथ ही तत्कालीन मेयर अंजू चौधरी, विधायक राधा मोहन अग्रवाल व अन्य को भी बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इनमें से किसी के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं होगा. दरअसल, गोरखपुर के रहने वाले परवेज परवाज और असद हयात की याचिका पर न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति एसी शर्मा की खंडपीठ ने लंबी बहस के बाद 18 दिसंबर 2017 को फैसला सुरक्षित कर लिया था.

याचिका में योगी को ठहराया गया था दंगे का कसूरवार
याचिका में कहा गया था कि गोरखपुर में 2007 में दंगे हुए थे. जिसमें तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ सहित अन्य ने दंगा उकसाया था. इस मामले में योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा चलाने से राज्य सरकार ने इनकार कर दिया है. सरकार के इसी आदेश की वैधता को हाईकोर्ट में परवेज परवाज ने याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी.

11 दिन पुलिस कस्टडी में रखे गए थे योगी आदित्यनाथ
गौरतलब है 2008 में मोहम्मद असद हयात और परवेज ने दंगों में एक व्यक्ति की मौत के बाद सीबीआई जांच को लेकर याचिका दाखिल की थी. याचिका में सांसद योगी आदित्यनाथ के भड़काऊ भाषण को दंगे की वजह बताया गया था. जिसके बाद तत्कालीन गोरखपुर सांसद को गिरफ्तार कर 11 दिनों तक पुलिस कस्टडी में भी रखा गया था. याचिका में योगी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 153, 395 और 295 के तहत जांच की मांग की गई थी. जिसके बाद केस की जांच सीबी-सीआईडी ने की. सीबी-सीआईडी ने तत्कालीन सांसद के खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की क्योंकि प्रदेश की अखिलेश सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी थी.