तालाब किनारे झाड़ियों में तड़प रहा था नवजात, मां के आंचल के साथ ऐसे मिली जिंदगी

मीणों ने आम सहमति बनाते हुए निसंतान दंपत्ति संजय गुप्ता और उनकी पत्नी गायत्री देवी को नवजात शिशु को लालन-पालन के लिए सौंप दिया. 

तालाब किनारे झाड़ियों में तड़प रहा था नवजात, मां के आंचल के साथ ऐसे मिली जिंदगी
सांकेतिक फोटो.

प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. एक कलयुगी मां ने अपने नवजात बच्चे को तालाब के किनारे झाड़ियों के बीच लावारिस छोड़ दिया. नवजात बच्चे की रोने की आवाज सुनकर जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो उन्हें पूरे मामले की जानकारी हुई. 

दरअसल पूरा मामला विकासखंड उरुवा के ग्राम पंडित राम गरीब खदरहन का पूरा का है. नवजात बच्चे के की आवाज सुनकर मौके पर ग्रामीणों और राहगीरों की भारी भीड़ भी जुट गई. मौके पर पहुंचे कई निसंतान दंपतियों ने बच्चे को अपनाने की पेशकश की. जिसके बाद ग्रामीणों ने आम सहमति बनाते हुए ग्राम सभा उपाध्याय का पूरा के निसंतान दंपत्ति संजय गुप्ता और उनकी पत्नी गायत्री देवी को नवजात शिशु को लालन-पालन के लिए सौंप दिया. 

नवजात बच्चे को इस तरह से झाड़ियों में फेंके जाने को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं. लोग इस बात की आशंका जता रहे हैं कि किसी महिला ने लोक-लाज के भय से बच्चे को जन्म देने के बाद इस तरह से मरने के लिए झाड़ियों में छोड़ दिया था. लेकिन एक बार फिर से यहां वही कहावत चरितार्थ हुई 'जाको राखे साईयां मार सके ना कोय, बाल न बांका कर सके,जो जग बैरी होय.' फिलहाल इस नवजात बच्चे को अपनी मां की गोद भले ही नसीब नहीं हुई. लेकिन एक दूसरी मां के द्वारा उसे अपनाए जाने से उसे नया जीवन जरूर मिल गया है.

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