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अल्मोड़ा: 159 सालों से हो रहा इस रामलीला का मंचन, सिर चढ़कर बोल रहा है रामलीला का जादू

Almora: इस रामलीला की खासियत है इसका गायन पद्धति पर आधारित होना, जिसमें शास्त्रीय रागों के साथ सभी कलाकार अपने पात्र का गायन खुद ही करते हैं. 

अल्मोड़ा: 159 सालों से हो रहा इस रामलीला का मंचन, सिर चढ़कर बोल रहा है रामलीला का जादू
टेलीविजन और इंटरनेट के जमाने में भी अल्मोड़ा में रामलीला का जादू सिर चढ़कर बोलता है.

अल्मोड़ा, देवेंद्र सिंह बिष्ट: अल्मोड़ा (Almora) की ऐतिहासिक रामलीला (Ramlila) को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं और सभी पात्रों के अभिनय और गायन की दाद दे रहे हैं. अल्मोड़ा में होने वाली रामलीला को अब 159 वर्ष हो चुके हैं. इस रामलीला की खासियत है इसका गायन पद्धति पर आधारित होना, जिसमें शास्त्रीय रागों के साथ सभी कलाकार अपने पात्र का गायन खुद ही करते हैं. 

अनुभवी कलाकारों के चलते रामलीला का मंचन इतना जीवंत हो जाता है कि यहां बैठे दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. शास्त्रीय रागों और वरिष्ठ रंगकर्मियों के साथ प्रैक्टिस के बाद जब रामलीला के पात्र मंच पर उतरते हैं तो देखने वाले रामायण की कहानियों में खो जाते हैं.

आयोजकों के मुताबिक, 159 वर्ष पुरानी अल्मोड़ा की रामलीला को कुमाऊं की पहली रामलीला का गौरव प्राप्त है. अल्मोड़ा के रामलीला की मुख्य विशेषता रामलीला का सजीव मंचन है, जिसमें महिलाएं और छोटी उम्र के बच्चें शानदार अभिनय कर ऐसा समां बांधते है कि दर्शक झूमने और ताली बजाने पर मजबूर हो जाते हैं.

वरिष्ठ रंगकर्मियों और कलाकारों के साथ तीन महीने की कड़ी तालीम के बाद अपने पात्रों का मंचन करते हैं, जो पूर्णतया गेय पद्धिति पर होता है. इसमें हर कलाकार पर बराबर मेहनत की जाती है. वहीं दर्शकों पर भी अल्मोड़ा की रामलीला का जादू सिर चढ़कर बोलता है. रामलीला को देखने के लिए दर्शक बड़ी संख्या में आते हैं और रामलीला का आनंद लेते हैं.

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आधुनिक जमाने में टेलीविजन और इंटरनेट के जमाने में भी अल्मोड़ा में रामलीला का जादू सिर चढ़कर बोलता है. अल्मोड़ा में रामलीला की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बढ़ी संख्या में पर्यटक भी रामलीला का आनन्द ले कर मन्त्रमुग्ध हो जाते हैं.