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घनी झाड़ियों में मिली हजारों साल पुरानी सुरंग, एक छोर पर नदी का किनारा तो दूसरे पर है किला

अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुरंग के रास्ते राजा के सैनिक नदी से पानी ढोने का काम भी करते होंगे.

घनी झाड़ियों में मिली हजारों साल पुरानी सुरंग, एक छोर पर नदी का किनारा तो दूसरे पर है किला
घनी झाड़ियों के बीच सुरंग कत्यूरी शासन काल के समय की मानव निर्मित सुरंग है.

अल्मोड़ा (देवेंद्र सिंह बिष्ट): पुरातत्व विभाग को अल्मोड़ा के भिकियासैंण तहसील में हजारों साल पुरानी सुरंग मिली है. तहसील क्षेत्र में अभियान में जुटी पुरातत्व विभाग की टीम ने स्यालदे ब्लाक के एड़ीकोट गांव में हजारों साल पुरानी सुरंग की खोज की है. पुरातत्व विभाग के अधिकारी सुरंग को कत्यूरी राजवंश के शासनकाल की बता रहें हैं. करीब आधा किलोमीटर लम्बी यह सुरंग कत्यूरी शासनकाल में राजा, महाराजा और सैनिकों की सुरक्षा की के लिए बनायी गयी होगी. बीते एक माह से प्राचीन धरोहरों को खोजने के लिए हो रहे सर्वे के दौरान पुरातत्व विभाग को ऐतिहासिक मंदिर, मूर्तियां, नौले,जलस्रोत, प्रतिमाएं सहित कई महत्वपूर्ण अभिलेख मिले हैं.

क्षेत्रीय पुरातत्व ईकाई अल्मोड़ा भिक्यासैंण तहसील के स्याल्दे विकासखंड में एैतिहासिक मंदिरों, मूर्तियों और अभिलेखों की खोज में जुटा है.  करीब एक माह से भिकियासैंण तहसील के 397 गांवों में सर्वेक्षण अभियान जारी है. जिसमें पुरातत्व विभाग को अब तक कई प्राचीन मंदिर, गुफाएं, ताम्र पत्र, पेंटिंग, किले, सुरंग, पांडुलिपियां मिले हैं. पुरातात्विक लिहास से महत्वपूर्ण भिकियासैंण तहसील के क्षेत्र में मिले ऐतिहासिक मंदिर और अभिलेख छटी शताब्दी से उन्नीसवीं शताब्दी के बीच के हैं.

क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी चन्द्र सिंह चौहान के नेतृत्व में पुरातत्व विभाग का दल क्षेत्र में प्राचीन धरोहरों, मंदिरों सहित अभिलेखों की खोज में जुटा है. खोज के दौरान पुरातत्व विभाग की टीम को स्याल्दे विकासखंड के फणिया गांव के एड़कोट के जंगलों में सुरंग मिली है. घनी झाड़ियों के बीच सुरंग कत्यूरी शासन काल के समय की मानव निर्मित सुरंग है. करीब आधा किलोमीटर लम्बी यह सुरंग एड़कोट से शुरू होकर आगे खतरौन नदी तक बनी है.

क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी चन्द्र सिंह चौहान का कहना है कि कत्यूरी शासन काल में राजा महाराजाओं की सुरक्षा दृष्टि को देखते हुए यह सुरंग महत्वपूर्ण रही होगी. सुरंग के पास कत्यूरी शासन के दौरान बने कई मंदिर मौजूद हैं. सुरंग के एक छोर पर नदी का किनारा है और दूसरे छोर के उपर एक किला है. जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सुरंग का प्रयोग आपातकाल के दौरान किया जाता होगा. सुरंग के रास्ते राजा के सैनिक नदी से पानी ढोने का काम भी करते होंगे.

अधिकारी का कहना है इस सुरंग को संरक्षित करने के लिए भारत सरकार एक प्रस्ताव भेजा जाएगा साथ ही इसको पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के लिए राज्य पर्यटन विभाग को भी जानकारी दी जाएगी. पुरातात्विक लिहाज से संपन्न भिक्यासैंण क्षेत्र में खोज अभी भी जारी है.

पुरातत्व विभाग की टीम स्थानीय ग्रामीणों, गाईड, रिसर्च होल्डर और अपनी टीम के साथ बहुमूल्य पुरातत्व धरोहरों की खोज में जुटी है. क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी चन्द्र सिंह चौहान के नेतृत्व  में चन्द्र शेखर उपाध्याय, जगत सिंह मेहरा, संजय सिंह, चंदन सिंह, भूबन पांडे सहित कई लोग खोज में अभी भी जुटे हैं.