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ईंटों के जरिए बचाया जाएगा बारिश का पानी, सड़क के मलबे से बनाया गया 'पोरस पेवर ब्लॉक'

मलवे से बनने वाली इस ईट को पोरस पेवर ब्लॉक का नाम दिया गया है बनारस हिंदू विश्वविद्यालय स्थित आईआईटी के प्रोफेसर डॉक्टर निखिल साबू बताते हैं कि कंक्रीट के जंगल में परिवर्तित हो चुके शहर और महानगरों के लिए यह एक वरदान होगा.

ईंटों के जरिए बचाया जाएगा बारिश का पानी, सड़क के मलबे से बनाया गया 'पोरस पेवर ब्लॉक'

लखनऊ: पर्यावरण के अनमोल संसाधन को सहेजने की कोशिश अगर टेक्नोलॉजी से की जाए तो उसमें काफी गुंजाइश होती है कि वह चीज आपको लंबे समय तक लाभ पहुंचाएगी एक ऐसा ही करिश्मा बीएचयू के प्रोफेसर और उनकी टीम ने कर दिखाया है उनके द्वारा दावा किया जा रहा है कि गलियों में बिछाए जाने वाले ईट आगमन में सुविधाजनक होने के साथ ही बारिश की बूंदे भी सहेजेगी. देखा जाता है कि विकास के साथ शहरों में एक समस्या जो सबसे  ज्यादा देखने में आती है कि हर जगह केवल कॉंक्रीट ही कंक्रीट शहर होता जा रहा है कहीं न कहीं बारिश के पानी को यूंही नालों में व्यर्थ होता छोड़ दिया जाता है . लेकिन इन ईट के मदद से अब इस समस्या से निजात मिल जाएगा.

क्या है इस ईट की कहानी
पोरस पेवर ब्लॉक को तैयार करने में काफी टाइम और काफी रिसर्च किया गया है. बताया जा रहा है कि इन ईटों के माध्यम से बारिश का लगभग 70- 80 प्रतिशत पानी बचाया जा सकता है और उसका इस्तेमाल अन्य किसी काम में लाया जा सकता है. आईआईटी के प्रोफेसर का दावा है कि भूजल स्तर बढ़ाने में इसका काफी अहम योगदान रहेगा. इन ईटों की खास बात यह है कि यह पुरानी सड़क के मलवे से तैयार की जाती है.  

मलवे से बनने वाली इस ईट को पोरस पेवर ब्लॉक का नाम दिया गया है बनारस हिंदू विश्वविद्यालय स्थित आईआईटी के प्रोफेसर डॉक्टर निखिल साबू बताते हैं कि कंक्रीट के जंगल में परिवर्तित हो चुके शहर और महानगरों के लिए यह एक वरदान होगा.

अगर हम थोड़ा सी रिसर्च और थोड़ी सी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेंगे तो यह हमें देखने में आएगा कि यह हमारे पर्यावरण को संरक्षण करने में टेक्नोलॉजी रिसर्च काफी महत्वपूर्ण साबित होगी. डॉक्टर निखिल के निर्देशन में शोध छात्रों ने खराब सड़कों से निकले मलबे सीमेंट और सुपर प्लास्टिसर्जर लिक्विड का प्रयोग कर  पेवर ब्लॉक तैयार किया है. ऐसा ब्लॉक जिसे पानी छन्ने की शक्ति होती है.

पहले भी पोरस पावर ब्लॉक तैयार किए जा चुके हैं लेकिन यह सबसे अनोखा है
हालांकि पोरस पावर ब्लॉक पहले भी तैयार किए जा चुके हैं लेकिन पेवमेंट मैटेरियल यानी सड़कों की खराब गिटियो का पहली बार इस तरह का प्रयोग किया जा रहा है. इसके प्रयोग से प्राकृती संसाधन की बर्बादी काफी हद तक कम हो जाएगी. गलियों पाथवे फुटपाथ के इलावा कई दूसरे मार्गो में इस तरह के ब्लॉक का प्रयोग किया जा सकता है.

डॉ निखिल ने बताया कि पहले गिटीओं की सतह उसके ऊपर बालू की परत बिछाने के बाद ब्लॉक को लगाना होगा इसका स्वरूप थोड़ा ढलान बनाने पर पूरा पानी पूरी तरह एक किनारे आ जाएगा नालियों के जरिए इस पानी को कहीं भी इकट्ठा किया जा सकता है.  इस पूरे रिसर्च पर काफी दिनों से इनकी पूरी टीम काम कर रही है.

टीम के द्वारा बताया गया की सिंचाई में प्रयोग के साथ ही ट्रीटमेंट के बाद इसका प्रयोग पेयजल के रूप में भी किया जा सकता है. इस पूरी प्रक्रिया में कई तरह के रिसर्च किए जा रहे हैं. क्योंकि इन इंटो को वजन सहने के लिए बनाया जा रहा है जो लगातार रिसर्च करके तैयार किया जा रहा है आने वाले समय में इन ईटों में वजन सहने के हिसाब से इनको तैयार किया जाएगा. इन ईटो के 500 अलग-अलग ब्लॉक तैयार किए जा रहे हैं.

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